पाकुड़ में पहली बार प्री फैब्रिकेटेड मॉडल (स्टील स्ट्रक्चर) से बन रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण और भुगतान पर रोक लगा दी गई है। यहां 220 केंद्रों का निर्माण होना था। पांच आंगनबाड़ी केंद्र बन चुके थे। झारखंड में पहली बार प्री फैब्रिकेटेड मॉडल से आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण पाकुड़ में किया जा रहा था। लेकिन, अब न प्री फैब्रिकेटेड मॉडल से निर्माण होगा और न ही तैयार केंद्रों का भुगतान होगा। डीएमएफटी फंड से बनाए जा रहे एक आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण में 18 लाख रुपए की लागत आ रही थी। 220 केंद्रों पर करीब 40 करोड़ रुपए खर्च होने थे। स्टील स्ट्रक्चर से बने पांच आंगनबाड़ी केंद्रों की गुणवत्ता की शिकायत लोगों ने पाकुड़ डीसी मनीष कुमार से की थी। इसके बाद डीसी ने संयुक्त जांच टीम का गठन किया था। टीम में सात सदस्य थे। इसमें पाकुड़ एसडीओ, मजिस्ट्रेट, ग्रामीण विकास व भवन प्रमंडल विभाग के कार्यपालक अभियंता, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी और पाकुड़-लिट्टीपाड़ा के बीडीओ को रखा गया था। टीम ने पांचों केंद्रों की जांच की और रिपोर्ट में बताया कि निर्माण की गुणवत्ता ठीक नहीं है। ऐसा निर्माण राज्य के लिए अनुकूल नहीं है। इसके बाद काम बंद करा दिया गया। साथ ही, कार्य का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। पाकुड़ विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता जीतेंद्र कुमार ने कहा कि जांच में पाया गया कि कई जगह आंगनबाड़ी केंद्र क्षतिग्रस्त हैं। दीवारें और छत टूटी हैं। गड़बड़ी की रिपोर्ट में टीम ने सौंप दी है। निर्माण करनेवाली एजेंसी के मनीष कुमार अग्रवाल ने कहा है कि निर्माण कार्य बंद करने का आदेश दिया गया है। योजना की जांच कराने की जानकारी उन्हें नहीं है। यह भी सवाल उठ रहे : विभागीय जानकारी के अनुसार, प्री फैब्रिकेटेड मॉडल के आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जाने की अनुमति राज्य सरकार से नहीं ली गई है। इस मॉडल से बनने वाले आंगनबाड़ी केंद्र कितने मजबूत और टिकाऊ होंगे इसका परीक्षण नहीं कराया गया है। ऐसे भवन ईंट-सीमेंट से बेहतर कैसे होंगे, इसका भी जवाब किसी के पास नहीं है। आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण का ओपन टेंडर नहीं किया गया, बल्कि केंद्र सरकार के जीईएम (गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस) पोर्टल के जरिए ऑर्डर भेज दी गई और सामग्री मंगाकर निर्माण किया जा रहा है। टीम ने जांच में पाया कि इस मॉडल से बने स्ट्रक्चर को आसानी से तोड़ा जा सकता है। यह आंधी-तूफान में क्षतिग्रस्त हो सकता है। मुख्य ढांचा स्टील फ्रेम से बना है। इसे चोर आसानी से चुरा सकते हैं। स्ट्रक्चर का सामान पहले भी चोरी हो चुका है। भवन के कई हिस्से क्षतिग्रस्त मिले। जांच टीम ने यह सब आपत्तियां जताईं। रिपोर्ट में बताया कि इस तरह का स्ट्रक्चर झारखंड के लिए अनुकूल नहीं है।


