देश की पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन जल्द ही ट्रैक पर उतरेगी। इस ट्रेन को 800 से 1200 किमी की दूरी के लिए तैयार किया गया है। देशभर में पिछले से साल अलग-अलग राज्यों के ट्रैक्स पर इसकी टेस्टिंग की गई है। राजस्थान में दिल्ली से शुरू वाया जयपुर, जोधपुर से मुंबई जाने वाली स्लीपर वंदे भारत का कोटा मंडल में ट्रायल किया गया है। इससे पहले वंदे भारत का भी इसी ट्रैक पर परीक्षण किया गया था। इस दौरान 26 बार टेस्टिंग की गई जिसमें कभी पानी की बोतल रख कर तो कभी पानी का गिलास रख कर इसकी स्टेबिलिटी जांची गई। ट्रेन को इस दौरान 180 की स्पीड पर दौड़ाया गया। इसके बाद इमरजेंसी ब्रेक लगाए तो 33 सेकेंड में ट्रेन रुक गई। इस ट्रायल में कपलर फोर्स, एयर सस्पेंशन, ब्रेकिंग सिस्टम और घुमाव ट्रैक पर स्पीड टेस्ट किया जा रहा है। कोटा मंडल में 180 किमी/घंटा की स्पीड के ट्रायल के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने एक्स (X) पर वंदे भारत स्लीपर के ट्रायल का वीडियो पोस्ट किया था। ट्रेन की स्पीड एक फोन के स्पीडोमीटर पर देखी गई। फोन के पास में एक पानी का गिलास रखा हुआ था। जो पूरा भरा हुआ था। गिलास में से एक बूंद भी पानी बाहर नहीं निकला। ये पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी कोटा मंडल में हाई स्पीड ट्रेनों का ट्रायल किया जा चुका है। हाई स्पीड ट्रेनों का ट्रायल कोटा मंडल में ही क्यों किया जाता है। इस सवाल का जवाब जानने के लिए भास्कर ने वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन से बात की। पहले देखिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का ट्वीट कोटा मंडल में 180 किमी/घंटा की स्पीड के ट्रायल के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने एक्स (X) पर वंदे भारत स्लीपर के ट्रायल का वीडियो पोस्ट किया था। ट्रेन की स्पीड एक फोन के स्पीडोमीटर पर देखी गई। फोन के पास में एक पानी का गिलास रखा हुआ था। जो पूरा भरा हुआ था। गिलास में से एक बूंद भी पानी बाहर नहीं निकला। अब पढ़िए क्यों है ट्रेनों के लिए खास कोटा मंडल वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन बताते हैं- कोटा मंडल को हाई स्पीड ट्रायल के लिए जाना जाता है। गुड़ला से लबान 30 किमी तक कंटीन्यू 180 किमी की स्पीड मिलती है। यहां घुमाव कम होने के कारण 180 की स्पीड से ट्रायल के लिए सक्षम है। ट्रैक में भी 180 की स्पीड को सहने की क्षमता है। वहीं नागदा सेक्शन में 50 किमी की दूरी 3 टुकड़ों में कंटीन्यू 180 की स्पीड पर रन हो जाता है। उन्होंने कहा- सबसे बड़ी बात ये कि कोटा का ट्रैफिक मैनेजमेंट अच्छा है। वहीं दिल्ली-मुंबई ट्रैक पर हैवी ट्रैफिक रहता है। ट्रायल के दौरान गाड़ियों को रेगुलेट करना बड़ा चुनौती भरा काम है। इसी ट्रैक पर राजधानी का भी ट्रायल हुआ था वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन बताते हैं- कोटा नागदा वाला जो ट्रैक है यह 550 किमी का है। वहीं सवाई माधोपुर माधोपुर वाला ट्रैक 125 किमी का है। राज्य में यह ट्रैक सबसे अच्छी कंडीशन में हैं और एकदम सीधे हैं। इन ट्रैक पर घुमाव बेहद कम हैं। ऐसे में स्पीड टेस्ट के लिए और ब्रेकिंग सिस्टम चेक करने के लिए ये सबसे उपयुक्त हैं। अलग-अलग पार्ट में कई बार इनपर ट्रेन को उतारा जाता है और इसकी टेस्टिंग की जाती है। इस ट्रैक पर राजधानी ट्रेन का 130 KMPH और वंदे भारत ट्रेन का 160 से 180 KMPH पर ट्रायल हो चुका है। सूखे और गीले ट्रैक पर दौड़ाई सौरभ जैन बताते हैं- स्लीपर वंदे भारत को 26 बार 130 से लेकर 160 की स्पीड पर दौड़ाया गया। इस दौरान ट्रेन के इमरजेंसी ब्रेक लगाकर देखे। टेस्ट रिकॉर्ड में सामने आया कि ट्रेन इमरजेंसी ब्रेक में 33 सेकेंड पर रुक रही है। जैन ने बताया कि स्पीड टेस्टिंग नागदा-कोटा-सवाई माधोपुर रेल खंड पर सूखे और गीले ट्रैक पर भी की गई। सूखा ट्रैक बिलकुल सामान्य अवस्था का है, जबकि गीले ट्रैक को आर्टिफिशियल रूप से बारिश के लिए तैयार किया गया था। यहां ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम डिस्टेंस को जांच किया गया। इसके साथ ही ट्रेन में लगे खास कपलर फोर्स को भी चेक किया गया। इसके आंकड़े लेकर इकट्ठे किए गए। जिनका आखिर एनालिसिस किया जाएगा। जैन ने बताया- कोटा मंडल में स्लीपर वंदे भारत की टेस्टिंग के दौरान पानी के गिलास, बोतल रख कर इसकी स्टेबिलिटी की जांच की गई थी। पूरे महीने चलेगी टेस्टिंग जैन ने कहा- वंदे भारत में स्लीपर कोच 16 कोच, 11 थर्ड एसी कोच, 4 सेकेंड एसी कोच और 1 प्रथम श्रेणी एसी कोच शामिल है। थर्ड एसी में 67 बर्थ, सेकेंड एसी में 48 बर्थ और प्रथम श्रेणी एसी कोच 44 बर्थ की मौजूद हैं। बता दें कि रेलवे के अनुसंधान संस्थान और मानक संगठन (RDSO, लखनऊ) की टीम यहां ट्रेन की टेस्टिंग कर रही है। यह टेस्टिंग 31 दिसंबर से शुरू हुई थी जो जनवरी 2025 के पूरे महीने चलेगी। ऐसे हुई टेस्टिंग रेल मंत्री ने 1 सितंबर को दिखाई थी पहली झलक केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार (1 सितंबर) को वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के पहले मॉडल की झलक दिखाई थी। वे बेंगलुरु में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) की फैक्ट्री में ट्रेन का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान रेल मंत्री ने कहा था कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को 800 से 1200KM दूरी की यात्रा के लिए तैयार किया गया है। इसमें यात्री रात करीब 10 बजे चढ़ेंगे और सुबह डेस्टिनेशन पर पहुंच जाएंगे। यह ट्रेन मिडिल क्लास के लिए बनाई गई है। इसका किराया राजधानी के जितना ही होगा। ट्रेन में लगा है कपलर मैकेनिज्म रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, ट्रेन में कपलर मैकेनिज्म की नई टेक्नोलॉजी लगाई गई है। इससे ट्रेन का वेट कम होता है और स्ट्रेंथ बढ़ती है। कपलर दो कोच को जोड़ने वाला हिस्सा होता है। यह ऑस्टेनिटिक स्टील से बना होता है। रेल मंत्री के मुताबिक, ट्रेन को बनाते समय वेट बैलेंस और स्टेबिलिटी का ध्यान रखा गया है। व्हील और ट्रैक के बीच का मैकेनिकल हिस्सा खास तरीके से डिजाइन किया गया है। इससे ट्रेन के अंदर वाइब्रेशन और आवाज कम आएगी। अश्विनी वैष्णव ने दावा किया था कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की गिनती दुनिया की बेहतरीन ट्रेनों में होगी। ट्रेन के कोच और टॉयलेट को अपग्रेड किया गया है। ट्रेन में कई सेफ्टी फीचर्स हैं। मेंटेनेंस स्टाफ के लिए एक अलग केबिन बनाया गया है। लंबी दूरी की यात्रा का समय कम होगा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की लॉन्चिंग के साथ भारतीय रेलवे का लक्ष्य लंबी दूरी की यात्रा का समय कम करना है। खासकर दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-कोलकाता जैसे लंबे रूट पर यात्रियों को काफी सुविधा मिलेगी। हालांकि ट्रेन किस रूट पर चलेगी, अभी यह स्पष्ट नहीं है। कोटा में अब तक ये हो चुके ट्रायल पढ़ें वंदे भारत स्लीपर से जुड़ी खबर… राजस्थान से चलेगी देश की पहली AC स्लीपर वंदे भारत:दिल्ली-मुंबई के बीच होगा पहला रूट, किराया चेयर कार और एग्जीक्यूटिव कैटेगरी जितना ही राजस्थान को इस साल वंदे भारत के नए अवतार की सबसे बड़ी सौगात मिलने वाली है। देश की पहली AC स्लीपर वंदे भारत ट्रेन की शुरुआत मारवाड़ से होगी। वंदे भारत ट्रेन के नए एसी स्लीपर मॉडल के लिए जोधपुर में सेंट्रलाइज मेंटेनेंस डिपो बनाया जा रहा है। इसके लिए करीब 166 करोड़ रुपए खर्च होंगे। देशभर में जितनी भी स्लीपर वंदे भारत ट्रेन चलेंगी उनका मेंटेनेंस यहीं होगा। (पढ़ें पूरी खबर)


