रांची पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा है कि पारदर्शिता और जवाबदेही के नाम पर झारखंड सरकार के विविध विभागों के विभिन्न बैंक खाते में जमा राशि और उसपर अर्जित ब्याज को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के खाते में जमा करने का केन्द्र सरकार का फैसला एक ऐसा फरमान है जो मूलत: बदले हुए रूप में संवैधानिक व्यवस्था पर हमला है। तिर्की ने कहा कि इससे राज्य सरकार का आर्थिक तंत्र कमजोर होगा साथ ही संपूर्ण आर्थिक प्रक्रिया एवं राशि की विमुक्ति और भुगतान में जितनी प्रक्रियाओं को पूरा किया जायेगा उसके कारण होनेवाली देरी का घातक प्रभाव राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले विकास कार्यों पर होगा। तिर्की ने कहा कि झारखंड सरकार के सभी विभागों को अपनी सभी राशियों को रिजर्व बैंक के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म पर जमा करने का आदेश दिया जा चुका है और अब योजनाओं का पैसा सीधे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से ही जारी होगा। तिर्की ने कहा कि अभी इसी आदेश के परिणामस्वरुप झारखंड के विभिन्न बैंकों में जमा केन्द्रीय योजनाओं के 2425 करोड़ रुपये को ब्याज सहित भारतीय रिजर्व बैंक में जमा कराने को कहा गया है। जो 18 विभागों की योजनाओं के हैं। उन्होंने कहा कि वैसे तो यह नया कदम सरकारी फंड के प्रवाह में अधिक पारदर्शिता लाने, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये उठाने की बात कही जा रही है लेकिन इस आदेश के पीछे छुपी मंशा को कोई भी आसानी से समझ सकता है।


