भास्कर न्यूज| चाईबासा/ जगन्नाथपुर जिले की सुदूरवर्ती जेटेया पंचायत स्थित नयागांव उड़िया स्कूल के 36 में से 17 बच्चे इन दिनों उल्टी दस्त के बाद अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। इस स्कूल के अलावा गांव के अन्य स्कूलों में पढ़ने वाले पांच बच्चों सहित एक महिला भी उल्टी दस्त से पीड़ित हैं। एक बच्ची की मौत हुई है। फिलहाल बाकी अस्पतालों मे भर्ती हैं। घटना 27 मार्च की है। वहीं मरीजों की तादाद नयागांव में बढ़ रही है। इधर दो दिनों से स्कूल में कोई बच्चा नहीं आ रहा है। गांव में दहशत है। इस मामले में प्रथमदृष्टया मिड-डे-मील खाने से बच्चों के बीमार होने की बात कही जा रही है। अब तक 20 बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं। शनिवार को घटना के तीसरे दिन जिला स्तर से स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग की अलग-अलग टीम स्कूल पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। शनिवार को चाईबासा सदर अस्पताल और बड़ाजामदा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में कैंप लगाकर सभी बच्चों और ग्रामीणों की जांच की। इस जांच में यह बात सामने आया कि 27 अप्रैल को स्कूल में भोजन पारा टीचर भीष्म गोप ने बनाया था। क्योंकि रसोइया बीमार थीं और छुट्टी पर थीं। उस दिन मसूर दाल, आलू बैगन की सब्जी और चावल बना था। इधर गांव वाले दैविक प्रकोप मानकर तीन अलग-अलग रंगों की मुर्गियों की पूजा करने के लिए चंदा किया है। ताकि उनके बच्चे सुरक्षित रहें। फूड सेफ्टी अफसर अभिषेक आंनद व उनकी टीम ने स्कूल में पहुंच कर भोजन बनाने के अनाज और पाकशाला की गंभीरता से जांच की। उन्होंने एक्सपाइरी हो चुकी हल्दी पाउडर, गंदे बोतल में रखे गए सरसों तेल और पानी का सैंपल लिया। सैंपल को जांच के लिए फूड एंड सेफ्टी डायरेक्टोरेट, नामकुम रांची भेजा गया है। वहीं स्कूल के हेडमास्टर वीरेंद्र महतो ने पूछताछ में बताया कि मिड-डे-मिल का अनाज उनके घर में रहता है। रोजाना लेकर आते हैं। क्योंकि स्कूल में अनाज रखने पर चूहा खा जाते हैं। शनिवार को चाईबासा सदर अस्पताल और बड़ाजामदा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में कैंप लगाकर सभी बच्चों और ग्रामीणों की जांच की। शिक्षा विभाग के डीएसई प्रवीण कुमार और प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सुधामय साहू ने स्कूल पहुंचकर जांच की। वहीं फूड सेफ्टी अफसर अभिषेक आनंद ने शनिवार को स्कूल का दौरा किया। आनंद ने पाकशाला, चावल, दाल, तेल और मसालों की जांच की। इस जांच में ये बात सामने आई कि 27 अप्रैल को स्कूल में भोजन पारा टीचर भीष्म गोप ने बनाया था। क्योंकि रसोइया बीमार थी और वह छुट्टी पर थीं। उस दिन मसूर दाल, आलू बैगन की सब्जी और चावल बना था। स्कूल के 35 बच्चों ने दिन के 1 बजे खाना खाया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंच की बच्चों और ग्रामीणों की जांच। गंदे बोतल में सरसों तेल, खुले में बनती थी दाल, हेडमास्टर के घर रहता है अनाज


