पार्टी ही मेरी भूमिका तय करेगी; जो जिम्मेवारी मिलेगी, उसका निर्वहन करूंगा : रघुवर

ओडिशा के राज्यपाल पद से विदाई लेकर भुवनेश्वर से रांची पहुंचे रघुवर दास ने कहा कि अंग्रेजों के समय से गवर्नर को लाट साहेब माना जाता रहा है। मैंने यह परंपरा तोड़ी है। अपने कार्यकाल में 14 महीने तक लगातार ओडिशा राजभवन को आम जनता के लिए खोल कर रखा था। आजाद भारत में राज्यपाल लाट साहब नहीं होता। वह भी जनता का प्रतिनिधि है। गुरुवार को भी रघुवर दास ने पुराने बयान को दोहराते हुए कहा कि पार्टी ही मेरी भूमिका तय करेगी। जो भी जिम्मेवारी मिलेगी, उसका निर्वहन करूंगा। इसके पहले गुरुवार शाम रांची एयरपोर्ट और धुर्वा स्थित सरकारी आवास पर रघुवर दास का जोरदार स्वागत हुआ। भाजपा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एयरपोर्ट पर उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया। सरकारी आवास पर पटाखे छोड़े गए। समर्थकों ने कहा- पिजड़े से शेर आजाद हो गया। पत्रकार इस उम्मीद में थे कि रघुवर दास पॉलिटिकल बातें करेंगे, लेकिन तकनीकी रूप से अब भी ओडिशा के राज्यपाल होने के नाते उन्होंने राजनीतिक सवालों को टाल दिया। कहा कि नव वर्ष में भाजपा की सदस्यता लेंगे। रघुवर दास की जगह मिजोरम के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति को ओडिशा का राज्यपाल बनाया गया है, पर संभावना है कि वे 2 जनवरी को भुवनेश्वर पहुंचेंगे और राज्यपाल का कार्यभार संभालेंगे। इस कारण रघुवर दास शुक्रवार को भाजपा में शामिल नहीं होंगे। पार्टी और जनता का हित ही है मेरा सर्वोच्च लक्ष्य रघुवर दास ने कहा- पार्टी और जनता का हित ही मेरे जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है। यह मेरी प्राथमिकता रही है। जब से होश संभाला, सक्रिय रूप से संगठन का कार्यकर्ता रहा। ओडिशा के राज्यपाल के रूप में अत्यंत सुखद अनुभव रहा। वहां के लोगों ने काफी प्रेम और स्नेह दिया। दास ने कहा- मेरी एक ही इच्छा है कि भाजपा सदैव शिखर पर रहे और मैं जब इस दुनिया से विदा लेकर परमात्मा के पास जाऊं तो भाजपा का झंडा मेरे शव पर रहे। मेरी जो भी पहचान है, वह भाजपा ने दी है।

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