पार्षदों की गुटबंदी से खुला रास्ता, पुराने चेहरे किए नजरअंदाज

तरनतारन झब्बाल में रविवार को हुई शिअद की रैली में पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने जब अचानक रिटायर्ड प्रिंसिपल बीबी सुखविंदर कौर का नाम तरनतारन विस उपचुनाव के उम्मीदवार के रूप में घोषित किया, तो मंच और पंडाल दोनों में हलचल मच गई। पुराने नेताओं और वफादार वर्करों की अनदेखी से कई अकाली नेता भौंचक्के रह गए। पूर्व मंत्री गुलजार सिंह रनीके और जिला प्रधान अलविदर पाल सिंह पखोके को दरकिनार कर नए चेहरे की ताजपोशी ने यह संकेत भी दे दिया कि शिअद अब रणनीति में आमूल बदलाव के मूड में है। सुखविंदर कौर का राजनीति से कोई सीधा नाता नहीं है। उनके पति शिरोमणि कमेटी से रिटायर हैं और तीन बेटियों की मां हैं। दरअसल, मार्च में हुए नगर कौंसिल चुनाव में आम आदमी पार्टी को 8 वार्डों में जीत मिली, जबकि 10 आजाद उम्मीदवारों ने विधायक डॉ. कश्मीर सिंह सोहल को समर्थन दिया। दूसरी ओर, 7 पार्षदों ने मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर के पाले में जाकर गुटबंदी को हवा दी। डॉ. सोहल के निधन के बाद आजाद पार्षदों ने अलग ग्रुप बनाकर महिला नेतृत्व को प्राथमिकता दी और बीबी सुखविंदर कौर को आगे किया। इसके बाद गांव झब्बाल के सरपंच राम सिंह और पूर्व सरपंच पम्मा ने अकाली दल को समर्थन देने की घोषणा करते हुए रैली आयोजित की। सुखबीर बादल ने रैली के दौरान महिला सशक्तिकरण का हवाला देते हुए बीबी सुखविंदर कौर को तरनतारन विस उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिया। यह फैसला सियासी रूप से जितना चौंकाने वाला था, उतना ही विरोधियों के लिए हमला करने का मौका भी। इधर, पूर्व अकाली विधायक और मौजूदा आप नेता हरमीत सिंह संधू ने भी इस फैसले पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “शिअद ने कहा था कि मेहनती और साफ-सुथरी छवि वाले नेता को टिकट देंगे, पर अब साफ है कि पार्टी के पास ऐसा कोई नेता नहीं बचा।” उन्होंने ऐलान किया कि शिअद की नीतियों और कार्यकर्ताओं की अनदेखी से तंग आकर उन्होंने पार्टी छोड़ी और 25 साल के सियासी सफर में जुड़े वर्करों की सहमति से ‘आप’ में शामिल हुए हैं।

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