भास्कर न्यूज | अमृतसर सेंट्रल हलके की वार्ड 57 के अंतर्गत आने वाले गली खटीकां, खूह कौड़ियां, फुल्ला वाला चौक और कटड़ा चढ़त सिंह इलाके के लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन क्षेत्रों में सीवरेज ब्लॉक, टूटी सड़कें और गंदगी ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें देने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा। गली खटीकां और कटड़ा चढ़त सिंह में सीवरेज चैंबर लगातार ब्लॉक हो रहे हैं। गंदा पानी गलियों में फैलकर बदबू और बीमारियों को न्योता दे रहा है। फुल्ला वाला चौक में तो हालात और भी बदतर हैं, जहां सीवरेज का पानी घरों के थड़ों के नीचे जमा होकर हरे रंग में तब्दील हो चुका है। खूह कौड़ियां इलाके में सड़कों की हालत खस्ता है। जगह-जगह गड्ढे बने हुए हैं और लंबे समय से पैच वर्क नहीं हुआ। इससे रोजाना आने-जाने वाले राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा से चुनाव लड़ी सरूचि शर्मा के पति संजय शर्मा ने कहा कि लोग उनके पास समस्या लेकर आते रहते है। लोग कहते है कि पार्षद समस्याओं का हल नहीं करवा रहे। पार्षद आगे लोगों से कहते है कि हलका विधायक काम नहीं होने दे रहे। राजनीति से उठकर चाहे पार्षद चाहे विधायक लोगों की समस्याओं का हल करवाना चाहिए। पार्षद मंजू मेहरा पप्पल ने कहा कि वार्ड में जहां भी समस्या आती है, उसका हल करवाया जाता है। बाकी वार्ड के गलियों के काम के लिए उनके काम लटकाए जा रहे हैं। वह विपक्ष में होने के कारण वार्ड से पक्षपात किया जाता है। गलियों में पैच वर्क का एस्टीमेट बना भेजा गया है, जैसे निगम पैसे जारी करेगा , वार्ड के सभी काम पूरे किए जाएंगे। मोहन लाल निवासी खूंह कौड़ियां ने बताया कि इलाके की सड़कें बरसों से टूटी हुई हैं। कई बार निगम में शिकायत की, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बारिश में गड्ढों में पानी भर जाता है और गिरने का डर बना रहता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए हालात और भी खतरनाक हो जाते हैं। नरेश कुमार निवासी गली खटीकां ने बताया कि यहां सीवरेज चैंबर बार-बार ब्लॉक हो जाता है। गंदा पानी गलियों में फैल जाता है, बदबू से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। बीमारी फैलने का खतरा हमेशा बना रहता है, लेकिन निगम के कर्मचारी सिर्फ अस्थायी खानापूर्ति करते हैं। जतिन कपूर निवासी कटड़ा चढ़त सिंह ने बताया कि इलाके में सीवरेज के ढक्कन टूटे पड़े हैं, जो खुले खतरे बने हुए हैं। गलियों में पैच वर्क भी अधूरा है। कभी बड़ा हादसा हो गया तो जिम्मेदारी कौन लेगा? वहीं सीवरेज चैंबर ब्लॉक है।


