चित्तौड़गढ़ के महिला एवं बाल हॉस्पिटल में बने पालना गृह में शनिवार को मिली नवजात बालिका को सोमवार को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को सौंप दिया गया। यह बालिका सुरक्षित परित्याग के तहत हॉस्पिटल के पालना गृह में रखी गई थी। हॉस्पिटल प्रशासन और बाल कल्याण समिति की निगरानी में बच्ची को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया और सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उसे सीडब्ल्यूसी को सौंप दिया गया। बालिका पूरी तरह स्वस्थ बाल कल्याण समिति को सौंपे जाने के समय नवजात बालिका का वजन 2.86 किलोग्राम दर्ज किया गया। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और किसी भी तरह की मेडिकल प्रॉब्लम सामने नहीं आई है। इससे पहले जब यह बालिका 31 जनवरी को महिला एवं बाल हॉस्पिटल के पालना गृह में मिली थी, उस समय उसका वजन 3275 ग्राम था। उस समय भी डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्ची को स्वस्थ बताया था। हॉस्पिटल में रहने के दौरान उसकी नियमित जांच होती रही और उसे जरूरी पोषण दिया गया। मदर मिल्क बैंक से मिलेगा दूध बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष प्रियंका पालीवाल के अनुसार अब इस नवजात बालिका को समिति के शिशु गृह में रखा जाएगा। वहां उसकी देखभाल प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा की जाएगी। बच्ची को पोषण के लिए मदर मिल्क बैंक के माध्यम से दूध उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि उसके स्वास्थ्य और विकास में किसी तरह की कमी न आए। समिति का कहना है कि शिशु गृह में बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल, साफ-सफाई और नियमित स्वास्थ्य जांच की पूरी व्यवस्था रहती है। कानूनी प्रक्रिया पूरी कर अडॉप्शन की तैयारी बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष प्रियंका पालीवाल ने बताया कि बच्ची के समिति के पास आने के बाद जरूरी कानूनी और मेडिकल जांच की जाएगी। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद बालिका को “लीगल फ्री” घोषित किया जाएगा। इसके बाद उसे गोद दिए जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि वह किसी परिवार में सुरक्षित और खुशहाल जीवन जी सके। उन्होंने बताया कि यह पूरा काम कानून के अनुसार किया जाएगा। सुरक्षित परित्याग होने से नहीं होगी कोई कार्रवाई समिति की अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि यह मामला सुरक्षित परित्याग का है, इसलिए बच्ची के परिजनों के खिलाफ किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। सरकार द्वारा बनाए गए पालना गृह का उद्देश्य ही यही है कि यदि कोई परिवार किसी कारणवश नवजात की देखभाल नहीं कर पा रहा है, तो वह बच्चे को सुरक्षित स्थान पर छोड़ सके। इससे बच्चे की जान बचती है और उसे भविष्य में बेहतर जीवन मिल सकता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बाल कल्याण समिति के सदस्य ओम प्रकाश लक्ष्यकार, सीमा भारती, एएनएम मंजू चौधरी और नीता लोट मौजूद रहे।


