राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को जैसलमेर विधायक छोटूसिंह भाटी ने नियम 295 के तहत क्षेत्र की समस्या को रखा। विधायक भाटी ने जैसलमेर जिले में सोलर और अन्य औद्योगिक कंपनियों को किए जा रहे भूमि आवंटन की प्रक्रिया पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे जनविरोधी और पर्यावरण विरोधी करार दिया। विधायक छोटूसिंह भाटी, बोले – ”प्रगति के नाम पर हम अपनी जड़ों और प्राकृतिक संसाधनों की बलि नहीं दे सकते। सोलर प्रोजेक्ट जरूरी है, लेकिन आमजन की सुविधा और पर्यावरण की कीमत पर नहीं। कंपनियों की तारबंदी ने रोके रास्ते विधायक छोटूसिंह भाटी ने सदन में मजबूती से पक्ष रखते हुए कहा कि जैसलमेर जिले में सोलर कंपनियों के नाम पर जमीनों का अंधाधुंध आवंटन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि सदियों पुराने सार्वजनिक रास्तों, ओरण, प्राकृतिक चारागाहों, नाड़ियों और आगोर जैसी महत्वपूर्ण भूमियों को भी कंपनियों के हवाले कर दिया गया है। उन्होंने कहा- कंपनियों द्वारा आवंटित भूमि पर की जा रही अवैध और मनमानी तारबंदी ने ग्रामीणों का जीना मुश्किल कर दिया है। पुराने रास्ते बंद होने से आमजन का आवागमन ठप है और पशुओं के लिए चरने की जगह नहीं बची है। पर्यावरण और संस्कृति पर प्रहार छोटूसिंह भाटी ने सरकार को आगाह किया कि जैसलमेर की पहचान उसकी ‘ओरण’ संस्कृति और पारंपरिक जल स्रोतों (नाड़ी व आगोर) से है। ये केवल जमीन के टुकड़े नहीं, बल्कि रेगिस्तान का इको-सिस्टम और ग्रामीणों की आस्था का केंद्र हैं। सोलर कंपनियों के हस्तक्षेप से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है और वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भूमि आवंटन के दौरान स्थानीय भौगोलिक स्थितियों और ग्रामीणों की जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। भाटी की सरकार से तीन प्रमुख मांगें:
आवंटन रद्द हो: जनोपयोगी, धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व की भूमियों को तुरंत कंपनियों के आवंटन से मुक्त किया जाए।
शर्तों में बदलाव: भविष्य में किसी भी कंपनी को जमीन देने से पहले पंचायत स्तर पर जनसुनवाई की जाए और स्पष्ट, सख्त शर्तें तय की जाएं।
रास्ते बहाल हों: जिन कंपनियों ने पुराने रास्तों और आगोर क्षेत्र पर कब्जा किया है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए आमजन के लिए रास्ते खुलवाए जाएं।


