पाली के वाले सिद्धार्थ लड्ढ़ा ने पहले ही प्रयास में CA फाइनल पास किया। उनकी इस सफलता पर परिवार काफी खुश है। केक-मिठाई खिलाकर दोस्तों और परिवार के लोगों ने उन्हें बधाई दी। वही रिश्तेदारों ने कॉल बधाई देते रहे। सीए फाइनल क्लियर करने की अभी तक कि अपनी जर्नी को लेकर सिद्धार्थ ने दैनिक भास्कर को कुछ यह बताया। सिद्धार्थ ने बताया कि उन्होंने कभी पढ़ाई को बोझ नहीं समझा और न कभी डिप्रेशन में आए। जब भी खुद को रिफ्रेश करना होता था तो अच्छी मूवी देख लेता था, वीडियो गेम खेल लेता और दोस्तों और परिवार के लोगों के साथ बैठकर पढ़ाई के अलावा अन्य मुद्दों को लेकर चर्चा करता था। इसका उन्हें बहुत फायदा भी मिला।
उन्होंने बताया कि उनके चाचा कुमेश लड्ढा गुजरात के गांधीनगर में CA फर्म चलाते है। शुरू से ही उनसे प्रभावित रहा। वे भी समय-समय पर मुझे इसी फिल्ड में कॅरियर बनाने के लिए प्रोत्साहित और गाइड करते रहे और उन्होंने ही स्कूली शिक्षा के दौरान ही सीए फिल्ड में ही अपना कॅरियर बनाने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया।
पाली में हुई स्कूल-कॉलेज शिक्षा पूरी
सिद्धार्थ ने बताया कि उनकी स्कूली शिक्षा सैंट्रल एकडेमी स्कूल पाली में हुई। बीकॉम की पढ़ाई बांगड़ कॉलेज से की। 10वीं में उनके 91 प्रतिशत तो 12वीं में 94 और बीकॉम में 70 प्रतिशत अंक बने। 12वीं पास करने के बाद उन्होंने सीए फाउंडेशन क्लीयर किया। एक साल के गेप के बाद सीए इंटर किया। उसके बाद सीए फाइनल करने की तैयारी में जुट गया। रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई करता था। ऑनलाइन कोचिंग भी की। जिसका नतीजा यह रहा कि पहले ही प्रयास में सीए फाइनल क्लीयर किया। उन्हें 413 अंक मिले। क्लीयर करने के लिए कम से कम 300 अंकों की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि देश के टॉप-60 में वे भी शामिल है। टीचर माता-पिता का शुरू से मिला सहयोग
सिद्धार्थ के पिता दिनेश लड्ढा पाली जिला मुख्यालय से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित डेंडा गांव के सरकारी स्कूल में प्रिंसपिल है। मां भावना लड्ढा शहर के ऐश्वर्या कॉलेज में लेक्चरर है। शिक्षा के क्षेत्र में जुड़े माता-पिता को शुरू से ही सिद्धार्थ को अच्छा स्पॉट मिला। जिसके चलते वे अपने लक्ष्य को पूरा करने में कामयाब हुई। सिद्धार्थ की छोटी बहन गार्गी लड्ढा भी पढ़ाई में होशियार है और वर्तमान में बीए सैकेंड ईयर की पढ़ाई कर रही है।


