कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरी महाराज की पावन निश्रा में शनिवार को पाली के अणुव्रत नगर ग्राउंड पर नौ दिवसीय आध्यात्मिक कुंभ महोत्सव का शुभारंभ हुआ।
यहां साधना शिविर स्थल पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी नजर आई। ढोल-नगाड़ों के साथ जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरी का आगमन हुआ। गुरुदेव ने साधना स्थल पर विराजित देवी-देवताओं की विधिवत पूजा-अर्चना कर साधना शिविर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को साधना के गूढ़ रहस्यों, मंत्रों के महत्व और कष्ट निवारण के उपायों की जानकारी दी गई। कई श्रद्धालुओं द्वारा समृद्धि आकर्षण से जुड़े जीबु कॉइन और पायरेट लक्ष्मी यंत्रों को सिद्ध करने की प्रक्रिया भी शुरू करवाई गई।
दोपहर बाद जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरी के सान्निध्य में काशी से आए 51 पंडितों ने महालक्ष्मी महायज्ञ विधि विधान से शुरू किया।
यज्ञ में गुरुदेव ने मंत्रों के साथ आहुति दी। करीब ढाई घंटे तक चले पहले दिन के यज्ञ में गाय के शुद्ध देसी घी, चंदन, औषधियों और दुर्लभ जड़ी-बूटियों के साथ आहुतियां दी गई। शाम को श्रद्धालुओं ने तन्मय होकर गुरुदेव के श्रीमुख से भैरव कथा का श्रवण किया। 1008 समृद्धि कलश बने आकर्षण का केंद्र
यज्ञशाला में स्थापित 1008 समृद्धि कलश श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। यह कलश इंदौर और उदयपुर में संपन्न नवरात्रि महा महोत्सव के दौरान करोड़ों आहूतियों और लाखों कुंकुमार्चन से सिद्ध किए गए हैं। कलशों में उपरत्न, हीलिंग जेम स्टोन, नव रत्न, पंचधातु, दुर्लभ औषधियां, सिद्ध रुद्राक्ष, श्री यंत्र, कुबेर यंत्र, लक्ष्मी यंत्र सहित अनेक दिव्य वस्तुएं प्रतिष्ठित हैं, जिन्हें लक्ष्मी महायज्ञ में पुनः सिद्ध किया जा रहा है। देशभर से श्रद्धालुओं की भागीदारी
कथा पांडाल में अष्ट भैरव तथा मां लक्ष्मी और पद्मावती के विभिन्न स्वरूपों की विशाल प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रही हैं। नौ दिवसीय इस आध्यात्मिक महोत्सव में राजस्थान सहित मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब और गुजरात समेत कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंच रहे है।


