पाली में परिवहन विभाग का फिटनेस सेंटर बंद:ट्रक-पिकअप-ट्रेलर की जांच ठप; बाहरी लोगों के काम करने का आरोप

पाली शहर में परिवहन विभाग का फिटनेस सेंटर बंद होने से व्यावसायिक वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फिटनेस जांच नहीं होने से ट्रक, पिकअप और ट्रेलर जैसे वाहनों का कार्य प्रभावित हो रहा है। इस मुद्दे को लेकर श्री पाली गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर सेंटर को शीघ्र शुरू करने की मांग की। फिटनेस जांच बंद, बीमा क्लेम पर भी संकट एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्रसिंह राठौड़ ने बताया कि फिटनेस सेंटर बंद होने से व्यावसायिक वाहनों की अनिवार्य फिटनेस जांच पूरी तरह से ठप पड़ी है। ऐसी स्थिति में यदि कोई दुर्घटना होती है तो बीमा कंपनियां फिटनेस प्रमाणपत्र के अभाव में क्लेम देने से इनकार कर देती हैं। इससे वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि या तो तत्काल फिटनेस सेंटर को दोबारा शुरू किया जाए या वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। साथ ही, फिटनेस से संबंधित चालान काटने की कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई गई। ज्ञापन सौंपने के दौरान जुगल किशोर दाधीच, भूराराम, प्रकाश बोहरा, जितेंद्र भंडारी, अशोक त्रिवेदी, राजेश जैन, महेंद्रसिंह राजपुरोहित और कैलाश गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। शिवसेना शिंदे का आरोप- विभाग में बाहरी लोग कर रहे काम इधर, शिवसेना (शिंदे गुट) के पदाधिकारियों ने भी परिवहन विभाग में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। जिला प्रमुख तख्तसिंह सोलंकी और जिला प्रवक्ता राजू देवासी के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि विभागीय कार्यालय में बाहरी व्यक्तियों द्वारा सरकारी कार्मिक के रूप में काम किया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है। उन्होंने लोक परिवहन की बसों को निर्धारित मार्ग पर संचालित करवाने और बंद पड़े फिटनेस सेंटर को शीघ्र प्रारंभ करने की मांग की। इस दौरान उदय शेट्टी, जिला मंत्री मगराज पादरली, मुकेश काका, जितेंद्र राव, दिनेश देवड़ा, भूराराम परिहार, शेखर परिहार और जितेंद्र वैष्णव सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रशासन से त्वरित समाधान की मांग दोनों संगठनों ने प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि समस्या का समाधान नहीं होने पर आगे आंदोलन किया जा सकता है। फिलहाल वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की नजर प्रशासनिक निर्णय पर टिकी हुई है।

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