महाराजा श्री उम्मेद मिल्स के पीछे से निगम के नाले में जाता प्रदूषित पानी पकड़ा गया। प्रदूषण नियंत्रण मंडल की टीम ने 29 दिसम्बर को किए निरीक्षण में यह गड़बड़ी पकड़ी गई। जांच में पानी पीएच 10 से भी ज्यादा निकला। बता दे कि फैक्ट्री में एक हजार परिवार रह रहे, फिर भी एसटीपी नहीं है। आवासीय कॉलोनी का सीवरेज नाला उम्मेद मिल के प्रदूषित पानी के टैंक के पास से निकलता हुआ मिला। वही मामले में मिल के प्रबंधक कुंजबिहारी धूत ने कहा कि बोर्ड की टीम ने निरीक्षण किया तब प्लांट का प्रोसेस बंद था। बाकी ऐसा गलत कभी ना हुआ है ना होगा।
मिल में एसटीपी प्लांट नहीं है। पाली शहर की सबसे बड़ी कपड़ा मिल महाराजा उम्मेद मिल्स से प्रदूषित पानी सीधा छोड़ा जा रहा था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरपीसीबी) पाली ने 26 दिन में दूसरी बार निरीक्षण में प्रदूषित पानी नगर निगम के नाले में छोड़ते पाए जाने पर नोटिस दिया है। आरओ अमित सोनी के नेतृत्व में गठित टीम ने यहां 9 व 10 और 29 दिसंबर को निरीक्षण किया था। पता चला कि मिल में ईटीपी होने के बाद भी केमिकल का प्रदूषित पानी ट्रीट नहीं किया जा रहा था। मिल से निकलने वाले प्रदूषित पानी को पीछे बने नगर निगम के नाले में सीधे छोड़ा जा रहा था। मिल के नाले के सैंपल की जांच में सीओडी 2160 एमजी मिला जो ट्रीट के बाद नियमानुसार 250 के आसपास होना चाहिए था। नगर निगम के नाले के पानी का सीओडी 2720 एमजी मिला था। जांच रिपोर्ट मुख्यालय भेजने पर टेक्सटाइल्स जीआईसी अभिषेक शर्मा ने लिखित में आदेश दिया कि क्यों ना इंडस्ट्री में प्रोसेस की प्रक्रिया के साथ पानी और बिजली की आपूर्ति को ही बंद कर दिया जाए। अब 15 दिन में जवाब तलब किया है।


