पासपोर्ट दफ्तर घर आएगा:दस्तावेजों की जांच, बायोमेट्रिक स्कैनिंग वैन में ही होगी

छत्तीसगढ़ में पहली बार ऐसा हो रहा है जब पासपोर्ट का काम आम लोगों के घरों के सामने होगा। अभी तक बड़े शहरों जैसे रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर समेत कई शहरों में पासपोर्ट दफ्तर हैं। यहां के लोग आसानी से दफ्तर पहुंच जाते हैं, लेकिन बाकी लोग जिनके शहरों में पासपोर्ट दफ्तर नहीं है, उन्हें लंबी दूरी तय कर पासपोर्ट बनवाने जाना पड़ता है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने के बाद लोगों को पाससोर्ट सेंटर जाकर बाकी की प्रक्रिया पूरी करनी होती ​थी। कई बार दस्तावेज पूरे नहीं होने से उन्हें दोबारा जाना पड़ता ​था। इस परेशानी को दूर करने के लिए केंद्रीय विदेश मंत्रालय की ओर से पासपोर्ट मोबाइल वैन चलाई जा रही है। योजना के तहत इस हाईटेक वैन में फिंगर प्रिंट्स और बायोमेट्रिक स्कैनिंग मशीन, दस्तावेजों की जांच, फोटो खींचने समेत सभी तरह के काम होंगे। यानी पासपोर्ट बनाने की पूरी प्रक्रिया इसी वैन में हो जाएगी। अलग-अलग इलाकों में हफ्ते में एक बार इस वैन को पहुंचाया जाएगा। लोगों को केवल इस वैन तक पहुंचना होगा। बाकी के काम वैन में तैनात कर्मचारी और अफसर कर लेंगे। मध्यप्रदेश, राजस्थान समेत कई राज्यों में यह सुविधा शुरू भी हो गई है। अब इस योजना में छत्तीसगढ़ को भी शामिल कर लिया गया है। जल्द ही छत्तीसगढ़ पासपोर्ट दफ्तर को पहली वैन मिलने वाली है। यहां वैन कहां-कहां जाएगी इसका रूट भी तैयार किया जा रहा है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट में पता चलेगा गाड़ी कब-कहां आएगी ऐसे करेंगे आवेदन इसलिए हर साल बढ़ रहे आवेदक बिना पासपोर्ट के विदेश जाना संभव नहीं है। विदेश जाने वालों की संख्या भी हर साल बढ़ रही है। पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया भी आसान हुई है। तत्काल पासपोर्ट तीन दिन में उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए शुल्क 3500 रुपए ही है। सामान्य पासपोर्ट के लिए 1500 रुपए शुल्क लिया जाता है। सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दो हफ्ते में इसे जारी कर दिया जाता है। लोगों की सुविधा के लिए मोबाइल वैन शुरू की जा रही है। इसमें पासपोर्ट बनाने के सारे काम होंगे। लोगों को सेंटर तक नहीं जाना होगा। शुरुआत में इस वैन को वहां चलाया जाएगा जहां पासपोर्ट दफ्तर नहीं है। ताकि लोग घरों के सामने ही पासपोर्ट बनवा सकें। -गौरव गर्ग, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी 19 साल में 6 लाख लोगों ने पासपोर्ट बनवाए
रायपुर में 2007 में पासपोर्ट दफ्तर खुलने के पहले तक लोगों को नया पासपोर्ट बनवाने के लिए भोपाल जाना पड़ता था। पहली बार दफ्तर खुला तो उस वर्ष 45 पासपोर्ट बने थे। इसके बाद हर साल पासपोर्ट बनवाने वालों की संख्या बढ़ती गई। पिछले तीन साल से हर साल 50 हजार से ज्यादा लोग पासपोर्ट बनवा रहे हैं। 2023 में 58504 लोगों के पासपोर्ट बने थे। 2024 में 52 हजार से ज्यादा लोगों ने पासपोर्ट बनवाए। कोरोना काल में भी यानी 2020 में 20,736 और 2021 में 29,954 लोगों ने पासपोर्ट बनवाए ​थे। अफसरों के अनुसार 19 साल में करीब 6 लाख लोगों ने पासपोर्ट बनवा लिए हैं।

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