राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में तीन दिवसीय पिंकफेस्ट 2025 का भव्य शुभारंभ हुआ। इस चौथे संस्करण में कला, संगीत, साहित्य और संवाद का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसमें देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों, लेखकों और वक्ताओं ने भाग लिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और संवाद सत्रों ने इस आयोजन को और भी जीवंत बना दिया। फेस्टिवल का शुभारंभ आरआईसी निदेशक एनसी गोयल, फेस्टिवल मेंटर प्रो. चिन्मय मेहता, फेस्टिवल कन्वीनर भवानी शंकर शर्मा, पिंकफेस्ट के फाउंडर सत्यजीत तालुकदार, नर्मदा प्रसाद उपाध्याय, एनपी पाढ़ी, संजीव गौतम, भरत गुप्त और प्रताप राव समेत कई वरिष्ठ कलाकारों ने दीप प्रज्वलन कर किया। “भारतीय कलाओं में कथनात्मकता” विषय पर आयोजित सत्र में पद्मश्री भरत गुप्त ने कहा, “सभी कलाएं एक ही रस सूत्र से जुड़ी होती हैं, जो मनुष्य को आत्मा प्रदान करती हैं।” इस सत्र में नर्मदा प्रसाद उपाध्याय, लक्ष्मी कृष्णामूर्ति, डॉ. तूलिका गुप्ता ने भी अपने विचार रखे। “रचनात्मक प्रक्रिया की अवधारणा” सत्र में भारतीय कला में रंगों के महत्व पर चर्चा करते हुए आर रामानंद ने कहा, “रंग जिज्ञासा का स्रोत होते हैं, कलाकार अपने चित्र में रंगों के माध्यम से अपने भाव व्यक्त करता है।” इस सत्र में राकेश व्यास, सुदेश शर्मा, प्रो. संगीत पिल्लै और नीकी चतुर्वेदी समेत कई विशेषज्ञ मौजूद रहे। 400 से अधिक पेंटिंग्स की प्रदर्शनी फेस्टिवल में प्रसिद्ध कलाकार धर्मेंद्र राठौड़ के क्यूरेशन में देश-विदेश के 100 कलाकारों की 400 से अधिक पेंटिंग्स प्रदर्शित की जा रही हैं। इन पेंटिंग्स में राजस्थान की कला, संस्कृति और धरोहरों को बखूबी संजोया गया है। प्रदर्शनी में ब्राजील, नार्वे, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के कलाकारों के साथ-साथ रितिक पटेल, अभिषेक शर्मा, सूरज पटेल, श्रीधर अय्यर, मुकेश साल्वी, आरबी गौतम, केआर सुभाना, जयंत पारिख, सुभाष चंद, कुश माली जैसे भारतीय कलाकारों की कृतियां शामिल हैं। ऑथर्स कॉर्नर: नई पुस्तकों का विमोचन फेस्ट के पहले दिन बोधि प्रकाशन की दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया गया। इसमें मधु सक्सेना की कविता संग्रह “चुटकी भर” और मनीष पारीक का काव्य संग्रह “मिलूंगा तुम्हें” का विमोचन किया गया। इस दौरान प्रसिद्ध लेखकों, प्रकाशकों और साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति में इन पुस्तकों पर विस्तृत चर्चा की गई। पहले दिन की मुख्य प्रस्तुतियां फेस्टिवल के पहले दिन कई आकर्षक गतिविधियां और प्रस्तुतियां हुईं, जिनमें लाइव आर्ट कैंप, कल्चर रैम्प वॉक, थिएटर प्रस्तुतियां, कथक और शास्त्रीय गायन-वादन, लोक संगीत और स्टोरी टेलिंग, डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘द गोल्डन लाइट’ की स्क्रीनिंग (निर्देशक: जॉय बनर्जी) शामिल थे। शाम को “रीला होता” द्वारा प्रस्तुत ओडिसी नृत्य ने आध्यात्मिक दर्शन को दर्शकों के समक्ष सजीव कर दिया। दिन का अंतिम कार्यक्रम “कलम” रहा, जिसमें लोककला, थिएटर, कार्यशालाओं और प्रदर्शनी का आयोजन हुआ।


