पिता को नहीं बचा सके,3 करोड़ का हॉस्पिटल बना दिया:दो साल में बनी 5 बीघा जमीन पर मॉर्डन PHC, 20 कमरों में अलग-अलग सुविधाएं

इलाज के अभाव में पिता की मौत बेटे के दिल पर ऐसा जख्म छोड़ गई, जो 43 साल बाद भी हरा है। गांव में सही समय पर इलाज नहीं मिलने से पिता को खोने का दर्द झेल चुके बेटे ने ठान लिया कि अब किसी और परिवार को यह पीड़ा न सहनी पड़े। इसी सोच के साथ बेटे ने 3 करोड़ रुपए खर्च कर गांव में मॉडर्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनवा दिया। जालोर जिला मुख्यालय से करीब 26 किलोमीटर दूर बालवाड़ा ग्राम पंचायत में नथमल मोतीलाल जैन ​​​​​​ने ​5 बीघा सरकारी भूमि पर करीब 3 करोड़ रुपए की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया है। हॉस्पिटल का गुरुवार को उद्घाटन किया जाएगा। लोगों के इलाज के लिए सरकार को सौंपा जाएगा। 43 साल पहले इलाज नहीं मिलने से पिता की हो गई थी मौत बालवाड़ा गांव निवासी एवं वर्तमान में मुंबई में रह रहे भामाशाह नथमल मोतीलाल जैन ने बताया कि करीब 43 साल पहले उनके पिता मोतीलाल जैन को 57 वर्ष की उम्र में फूड पॉइजनिंग की शिकायत हुई थी। उस समय गांव में इसी स्थान पर केवल एक छोटा सा आयुर्वेदिक अस्पताल था, जहां समय पर और उचित इलाज नहीं मिल सका। इलाज के अभाव में उनके पिता की मौत हो गई। पीतल के पार्ट्स का काम करते थे मोतीलाल जैन नथमल जैन ने बताया कि उनके पिता मोतीलाल जैन पीतल के पार्ट्स बनाने का काम करते थे। वे हमेशा गांव और आमजन की सुविधा के लिए कुछ करने की इच्छा रखते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण वह अपने जीवनकाल में इस सपने को पूरा नहीं कर सके। बीमारी के दौरान उन्होंने अस्पताल बनवाने की इच्छा भी जताई थी, लेकिन इससे पहले ही उनका निधन हो गया। विकास हुआ, लेकिन इलाज के लिए आज भी भटकते रहे ग्रामीण समय के साथ गांव में सड़क, बिजली और अन्य सुविधाओं का विकास तो हुआ, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं बढ़ सकीं। इलाज के लिए ग्रामीणों को मांडवला, सायला और जालोर जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता था। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से स्थिति गंभीर हो जाती थी। बेटे ने लिया संकल्प, सरकार से की बात पिता की अधूरी इच्छा को पूरा करने के लिए बड़े बेटे नथमल जैन ने उसी सरकारी भूमि पर अपने माता-पिता की स्मृति में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने सरकार से वार्ता की, जिस पर सरकार ने पूरा सहयोग दिया। इसके बाद पुराने आयुर्वेदिक अस्पताल की जगह 5 बीघा भूमि पर वर्ष 2023 में भवन निर्माण कार्य शुरू कराया गया। नवंबर 2025 में बनकर हुआ तैयार, माता-पिता के नाम पर नामकरण करीब 3 करोड़ की लागत से बना यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नवंबर 2025 में बनकर तैयार हुआ। इसका नाम ‘सुरजबेन नथमल मोतीलालजी जैन राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बालवाड़ा’ रखा गया है। सांसद और मुख्य सचेतक करेंगे उद्घाटन आज गुरुवार को जालोर-सिरोही सांसद लुंबाराम चौधरी, मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग और साधु-संतों की उपस्थिति में अस्पताल का उद्घाटन किया जाएगा। उद्घाटन को लेकर गांव को दुल्हन की तरह सजाया गया है और ग्रामीण इसे एक उत्सव के रूप में मना रहे हैं। 5 बीघा में बना 20 कमरों का आधुनिक पीएचसी नथमल जैन ने बताया कि करीब 5 बीघा भूमि पर 20 कमरों का आधुनिक सुविधाओं से युक्त पीएचसी भवन तैयार किया गया है। इसमें ओपीडी, प्रसव कक्ष, जांच कक्ष, दवा वितरण कक्ष और स्टाफ के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। हजारों ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ नए पीएचसी के शुरू होने से बालवाड़ा सहित आसपास के कई गांवों के हजारों लोगों को प्राथमिक चिकित्सा, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण, सामान्य जांच और आपातकालीन उपचार की सुविधा गांव में ही मिलेगी। इससे दूर-दराज के अस्पतालों में जाने की मजबूरी खत्म होगी। प्रशासन और जनप्रतिनिधि रहेंगे मौजूद उद्घाटन कार्यक्रम में पूर्व मंत्री पुखराज पाराशर, जालोर कलेक्टर डॉ. प्रदीप गवांडे, सीएमएचओ भैराराम जाट, बीसीएमओ सायला रघुनंदन विश्नोई, एसपी शैलेन्द्र सिंह इंदोलिया, पूर्व विधायक रामलाल मेघवाल सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सरपंच और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे। ——— ये खबें भी पढ़े… अमेरिकी डॉक्टर ने बनवाया संसद भवन जैसा स्कूल:जहां जमीन में बैठकर पढ़े, वहां बनवाई 7 करोड़ की बिल्डिंग; मां ने दिया था सुझाव राजस्थान के जालोर में सोमवार को संसद भवन की तरह दिखने वाली एक खास स्कूल बिल्डिंग का उद्घाटन हुआ। सरकारी स्कूल की ये नई बिल्डिंग अमेरिकी एनआरआई डॉक्टर अशोक जैन ने बनवाई है। (पूरी खबर पढ़ें) संसद जैसी दिखने वाली स्कूल के उद्घाटन में नाचे मुख्य-सचेतक:बोले- जालोर भामाशाहों की धरती, इन्हें ये बच्चे-ग्रामीण कभी नहीं भूलेंगे जालोर के दादाल गांव में संसद भवन जैसी दिखने वाली सरकारी स्कूल का उद्घाटन हुआ तो मुख्य सचेतक जमकर नाचे। हाथों में नोट पकड़कर अमेरिकी डॉक्टर के हाथों में हाथ डालकर पारम्परिक डांस किया। (पूरी खबर पढ़ें)

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