पिता बोले- बेटे की इच्छा थी कि अंगदान करे:ब्रेन डेड आर्यंश के किडनी-लिवर से 3 युवकों को नई जिंदगी

पहांदा, अमलेश्वर के रहने वाले असीम आडिल ने अपने 18 वर्षीय बेटे का अंगदान का फैसला लिया है। 29 जनवरी को उनका बेटा आर्यंश आडिल जेईई की परीक्षा देकर घर आ रहा था। इसी दौरान महादेव घाट के पुल के पास उसका एक्सीडेंट हो गया। उसे ​निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उसके सिर में गंभीर चोट लगी है। उसकी ब्रेन स्टेम डेथ हो गई है। बेटे के अब दुनिया में अब न रहने के पहाड़ जैसा गम की खबर पाकर भी परिजन ने साहस दिखाया। अपने बेटे की इच्छा को ध्यान में रखकर पिता असीम और मां वर्षा ने अंगदान का फैसला किया। शनिवार को ब्रेनडेड आर्यंश को अंगदान के लिए एम्स ले गए। आर्यंश की दोनों किडनी और लिवर से तीन युवकों को नया जीवन मिला। उसकी किडनी एम्स में भर्ती 21 वर्षीय युवक को मिली। दूसरी किडनी रामकृष्ण अस्पताल के 24 वर्षीय युवक को और एक लिवर भी इसी में भर्ती एक युवक को दिया गया। प्रदेश का 11वां अंगदान
छत्तीसगढ़ में यह 11वां अंगदान है। इससे पहले 12 दिसंबर को डोंगरगढ़ की छात्रा निहाली टेम्भुरकर (25) का अंगदान हुआ था। तब एम्स में दो लोगों को नया जीवन मिला। दोनों मरीज डायलिसिस से जूझ रहे थे। नौजवानों के इस अंगदान ने कैडेवर ट्रांसप्लांट की दिशा में एक नया संदेश दिया है। बेटा समाज के लिए कुछ अच्छा करना चाहता था आर्यंश के पिता असीम आडिल ने बेहद गमगीन माहौल में भास्कर से बात की। बात करते समय उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे, गला रुंधा हुआ ​था। असीम बोले- आर्यंश पढ़ाई में अच्छा था। जेईई की तैयारी कर रहा था। 29 जनवरी को उसकी परीक्षा थी। वह पेपर देकर दोपहर में घर लौट रहा था। महादेव घाट पुल के आगे बढ़ा ही था कि उसका एक्सीडेंट हो गया। हमें सूचना मिली तो उसे पहले हम उसे नजदीक के अस्पताल ले गए। वहां से उसे एक अन्य निजी अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों ने हमसे कहा कि उसके सिर में गहरी चोट लगी है। तब से वह बेहोश है। डॉक्टरों ने उसे ब्रेन स्टेम डेथ कह दिया। यह सुनकर मेरे पैरों के नीचे से जमीन ही खिसक गई। फिर मैंने बेटे की बातें याद कर बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला। आर्यंश हमेशा कहता ​था कि बड़ा होकर वह समाज के लिए कुछ अच्छा करना चाहता है। पहले भी उसने यह बात कही थी कि अगर मुझे कुछ हो जाए तो अपने अंगदान कर दूंगा। आज वह उस स्थिति में पहुंच गया। हमने उसकी इच्छा को आगे बढ़ाते हुए अंगदान का संकल्प लिया। अंगदान से किसी के शरीर में मेरे बेटे आर्यंश का अंश जीवित रहेगा।

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