पीएचडी प्रवेश परीक्षा 2023 में कई स्तरों पर हुई थी लापरवाही
रांची यूनिवर्सिटी (आरयू) के पीएचडी प्रवेश परीक्षा-2023 में गंभीर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। परीक्षा की चारों सीरीज (ए,बी,सी,डी) की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच एक ही आंसर-की से कर दी गई। जबकि, हर सीरीज के लिए अलग-अलग आंसर-की होनी चाहिए थी। इसके कारण कई अभ्यर्थी फेल घोषित कर दिए गए। पीएचडी प्रवेश के लिए कम से कम 50 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य है, लेकिन मूल्यांकन की इस चूक ने योग्य छात्रों को भी बाहर कर दिया। इस परीक्षा में कुल 633 सीटों पर नामांकन के लिए करीब 2600 से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। लेकिन, सिर्फ 204 छात्र ही सफल हो पाए और 429 सीटें खाली रह गईं। सोशियोलॉजी जैसे विषय में 30 सीटें थीं, लेकिन मात्र एक छात्र ही क्वालिफाई कर सका। परिणाम से नाराज अभ्यर्थियों ने परीक्षा विभाग की आउटसोर्सिंग एजेंसी के कार्यालय में एक सप्ताह तक तालाबंदी की और हंगामा किया। अंत में कुलपति समेत विश्वविद्यालय अधिकारियों से बातचीत के बाद 300 से अधिक छात्रों ने आपत्ति जताते हुए आवेदन दिए, लेकिन आज तक इन आपत्तियों का निराकरण नहीं किया गया है। सूचना के अधिकार से हुआ मामले का खुलासा रिजल्ट से असंतुष्ट कुछ अभ्यर्थियों ने आरटीआई के तहत उत्तर पुस्तिकाएं देखने का आवेदन दिया। इनमें से कुछ को कॉपियां दिखाई गईं, जिनमें कई छात्रों को पास होने के बावजूद कम अंक देकर फेल कर दिया गया था। एक अभ्यर्थी को हाल ही क्वालिफाई होने का प्रमाण पत्र जारी किया गया है। पहले के रिजल्ट में वह फेल था। गड़बड़ी की जानकारी नहीं: परीक्षा नियंत्रक आरयू के पीएचडी प्रवेश परीक्षा से संबंधित किसी प्रकार का डॉक्यूमेंट मेरे संज्ञान में नहीं आया है। तब परीक्षा विभाग का प्रभार मेरे जिम्मे नहीं था। इसलिए इस बारे में कुछ नहीं कह सकता हूं। – डॉ. विकास कुमार प्रभारी, परीक्षा नियंत्रक आरयू भास्कर खास यूनिवर्सिटी ने परीक्षा के बाद प्रोविजनल आंसर-की जारी नहीं की, जिससे गड़बड़ी पहले ही पकड़ी नहीं जा सकी। परीक्षा समाप्त होते ही केंद्रों पर अभ्यर्थियों से बुकलेट जब्त कर ली गई, जिससे छात्र अपने उत्तरों का मिलान नहीं कर पाए। कॉमर्स समेत कई विषयों में पिछली परीक्षाओं के प्रश्न हू-ब-हू पूछे गए, जिसकी शिकायत भी यूनिवर्सिटी प्रशासन से की गई थी।


