पीएम की रैली सफाई कर्मचारियों-शिक्षकों से जुटाई भीड़:आप की नेता व मुख्यमंत्री आतिशी का आरोप, सरकार और सत्ता का हो रहा खुला दुरुपयोग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली को लेकर आम आदमी पार्टी ने बड़ा आरोप लगाया है। AAP का कहना है कि भाजपा ने भीड़ जुटाने के लिए एमसीडी सफाई कर्मचारियों, शिक्षकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों पर दबाव बनाया और उन्हें जबरन बसों में भरकर रैली में भेजा गया। AAP की वरिष्ठ नेता और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कई वीडियो साझा करते हुए कहा, “जिन सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी शहर को साफ करने की है, उन्हें छुट्टी के दिन जबरन रैली में भेजना भाजपा की घटिया राजनीति है। यह सरकार और सत्ता का खुला दुरुपयोग है।” कर्मचारियों की आपबीती एमसीडी कर्मचारियों ने भी खुलासा किया है कि उन्हें ड्यूटी के बहाने बुलाकर बसों में बैठाया गया और रैली में भेज दिया गया। एक कर्मचारी ने बताया कि उसकी गर्भवती पत्नी की डिलीवरी होनी है, लेकिन नौकरी से निकालने की धमकी देकर उसे रैली में भेजा गया। वहीं, एक महिला सफाईकर्मी ने कहा कि जन्माष्टमी पर व्रत रखने के बावजूद उसे रविवार को ड्यूटी के नाम पर बुलाया गया, जबकि छुट्टी के दिन उसकी हाजिरी भी नहीं लगाई गई। कर्मचारियों का कहना है कि रविवार हफ्ते भर की मेहनत के बाद आराम करने का दिन होता है, लेकिन भाजपा सरकार ने उन्हें भीड़ दिखाने के लिए बसों में भरकर भेज दिया। गरीब कर्मचारियों का अपमान किया आतिशी ने आरोप लगाया कि भाजपा गरीब दलित सफाई कर्मचारियों का अपमान कर रही है। एमसीडी कमिश्नर अश्विनी कुमार पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। जनकपुरी वार्ड-105 के पार्षद प्रवीण कुमार ने कहा कि “चार इंजन वाली सरकार के पास अपने कार्यकर्ता भी नहीं बचे, इसलिए सफाई कर्मचारियों को जबरन ले जाया जा रहा है।” दरियागंज वार्ड-142 की पार्षद और महिला विंग अध्यक्ष सारिका चौधरी ने कहा कि भाजपा की रैली में लोग खुद नहीं जा रहे, इसलिए कर्मचारियों को मजबूर किया जा रहा है। ‘‘आप’’ युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष मुकेश कुमार ने कहा, “यह भाजपा की रैली है, न कि सरकारी रैली। कर्मचारी रविवार को आराम करते हैं, लेकिन भाजपा ने उनकी छुट्टी भी छीन ली।” जनता नहीं जुटा पाई आतिशी ने पूछा भाजपा बताए कि किस कानून के तहत छुट्टी के दिन सरकारी कर्मचारियों को रैली में भेजा गया? क्या एमसीडी का काम मोदी जी की भीड़ बढ़ाना है? आप का आरोप है कि भाजपा जनता को नहीं जुटा पाई, इसलिए कर्मचारियों को मजबूर किया गया। पार्टी ने कहा कि यह कदम न केवल लोकतंत्र का अपमान है बल्कि दलित सफाई कर्मचारियों के अधिकारों का उल्लंघन भी है।

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