मप्र- राजस्थान में बनी सहमति, मप्र में जमा होगा 1908.83 मिलियन घन मीटर पानी मप्र और राजस्थान की साझेदारी में आकार लेने वाली देश की दूसरी नदी पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना (पीकेसी-ईआरसीपी) के तहत अब मप्र में 17 के बजाए 21 बांध व बैराज का निर्माण होगा। इनमें 17 बांध और 4 बैराज शामिल हैं। जबकि पिछले साल हुए एमओयू में कुल बांधों की संख्या 15 और बैराज की संख्या 2 थी। यह अतिरिक्त 2 बांध और 2 बैराज पार्वती नदी पर सीहोर जिले में बनेंगे। इसके अलावा मप्र की चंबल नहर प्रणाली का 1800 करोड़ से आधुनिकीकरण भी पीकेसी राष्ट्रीय परियोजना के तहत ही किया जाएगा। 17 दिसंबर को जयपुर में संशोधित पीकेसी-ईआरसीपी परियोजना के भूमिपूजन से पहले होने वाले ट्राई पार्ट एग्रीमेंट में मप्र के इन प्रस्तावों को जोड़ा जाएगा। राजस्थान कूनो नदी के पानी पर अपना दावा छोड़ देगा। इसके बदल में पार्वती बेसिन के पानी से मप्र राजस्थान को अतिरिक्त पानी देगा। चंबल बेसिन में उज्जैन, आगर मालवा और शाजापुर में 6 बांध बनने से राजस्थान को होने वाली पानी की कमी की भरपाई मप्र काली सिंध का पानी देकर करेगा। 5.98 लाख हेक्टेयर में सिंचाई होगी मप्र में बनने वाले 21 बांध बैराज में कुल जल भंडारण क्षमता 1908.83 एमसीएम (मिलीयन घन मीटर) तय की गई है। हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है दोनों राज्य कुल पानी का कितना-कितना शेयर आपस में बांटेंगे। में लगभग 5.98 लाख हेक्टेयर में जमीन में सिंचाई हो सकेगी। इसके अलावा पुरानी चंबल नहर प्रणाली के आधुनिकीकरण से भिंड-मुरैना, श्योपुर के 3.36 लाख किसानों को फायदा होगा। इस नहर प्रणाली को अपग्रेड कर इससे शाखाओं को बढ़ाया जाएगा। नहरों को पक्का करने के साथ ही पानी के पुख्ता हिसाब-किताब के लिए स्काड़ा सिस्टम भी लगाया जाएगा। डीपीआर तैयार कर ली… मप्र के जल संसाधन मंत्री तुलसी राम सिलावट के मुताबिक कालीसिंध डायवर्सन सिस्टम को छोड़कर सभी बांध-बैराज की डीपीआर तैयार कर ली गई है। जिसकी कुल लागत 33 हजार 820 करोड़ से अधिक आकलित की गई है। काली सिंध डायवर्जन सिस्टम की डीपीआर नेशनल वाटर डेवलपमेंट एजेंसी तैयार कर रहा है। इसकी लागत इसमें शामिल नहीं हैं। पूरी परियोजना की लागत की 90 फीसदी शेयर केंद्र सरकार और 10 फीसदी शेयर मप्र सरकार देगी। सीहोर में भी बनेंगे दो बैराज दो बांध: अब भोपाल के नजदीक सीहोर के श्यामपुर और करैया में पार्वती नदी पर दो अलग अलग बैराज बनेगें। सीहोर के जैठला में ही पार्वती नदी पर एक माइक्रो सिंचाई परियोजना और पड़ोन में दो छोटे बांध बनाए जाएंगे। 45.3 हजार हेक्टेयर जमीन में सिंचाई होगी।


