प्राचीन तपोस्थली पीर मत्स्येंद्रनाथ की समाधि पर मंगलवार को शरदोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। रात्रि में महाआरती के बाद खीर-प्रसादी का वितरण किया गया। अखिल भारतवर्षीय भेष बारह पंथ नाथ संप्रदाय मठ भृर्तहरि गुफा मंदिर के महंत पीर योगी रामनाथ महाराज ने चल समारोह के साथ समाधि स्थल पर चादर पेश की। पूजन-आरती के बाद यह आयोजन संपन्न हुआ। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। धर्मशास्त्रों में माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है। शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है और अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है। इस रात्रि को चंद्रमा का ओज सर्वाधिक ऊर्जावान होता है। इस दिन दूध और चावल की खीर बनाकर उसे खुले आसमान के नीचे रखा जाता है। मान्यता है कि चंद्रमा की किरणें खीर में अवशोषित होती हैं, जिससे उसमें अमृत तत्व आ जाता है। इस खीर का सेवन अमृतपान के समान माना जाता है। इसके अतिरिक्त, शहर के विभिन्न मंदिरों में भी शरद पूर्णिमा के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।


