सरकार जो नए नियम ला रही है, वह पुरानी अवैध बसाहटों/कॉलोनियों से इन पर कोई असर नहीं होने वाला है। इंदौर में चंदन नगर, आजाद नगर, द्वारकापुरी, प्रजापत नगर, परमाणु नगर सहित ऐसी 500 से ज्यादा कॉलोनियां हैं, जिन्हें अब हटाया नहीं जा सकता। इनके अलावा 647 नई अवैध कॉलोनियों के मामले मंजूरी के लिए कतार में हैं। 434 कॉलोनियां ऐसी हैं, जिन पर सरकारी विभागों की ही आपत्ति है। निगम सीमा के बाहर जिला प्रशासन दो साल में 100 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों के मामले में एफआईआर करवा चुका है। शहरी सीमा के बाहर 100 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां पर हो चुकी है एफआईआर रजिस्ट्री शून्य घोषित करने का था फैसला अवैध कॉलोनियों में प्लॉटों की रजिस्ट्री को शून्य कराए जाने का फैसला इस साल 26 मई को तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने लिया था। एक ही बिल्डर लाइसेंस का निर्णय अच्छा एक्सपर्ट के मुताबिक जुर्माने या सजा की है, वह जरूर लागू हो सकती है। शहर और ग्रामीण क्षेत्र के लिए एक ही बिल्डर लाइसेंस अच्छा निर्णय है, क्रेडाई इसके लिए लंबे समय से प्रयासरत है। इंदौर क्रेडाई चेयरमैन संदीप श्रीवास्तव के मुताबिक यह हमारी लंबे समय से मांग थी। काॅलोनी सेल को ऑनलाइन करने में इंदौर पहला जिला
इंदौर प्रदेश का पहला ऐसा जिला है, जहां काॅलोनी परमिशन का पूरा सिस्टम ऑनलाइन हो चुका है। जिला काॅलोनी सेल इंचार्ज, एसडीएम प्रदीप सोनी के मुताबिक ‘CROPS’ सॉफ्टवेयर से हर काम की समय-सीमा तय है। कलेक्टर शिवम वर्मा के मुताबिक 100 से ज्यादा पर कार्रवाई की जा चुकी है। इनकी रजिस्ट्री पर भी रोक है। आगे भी ऐसे मामले सामने आएंगे तो कार्रवाई होगी।


