गढ़चिरोली पुलिस और सीआरपीएफ को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। जिले के भामरागढ़ तालुका से सटे गढ़चिरौली-नारायणपुर सीमा क्षेत्र के घने जंगलों में हुई मुठभेड़ में 7 हार्डकोर माओवादियों को ढेर कर दिया गया। मारे गए माओवादियों पर महाराष्ट्र सरकार ने कुल 71 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। हालांकि इस अभियान में सी-60 का एक जवान शहीद हो गया, जबकि एक अन्य जवान घायल हुआ है। पुलिस को 3 फरवरी को गोपनीय सूचना मिली थी कि कंपनी नंबर-10 के शेष माओवादी और छत्तीसगढ़ के दलम सदस्य गढ़चिरौली-नारायणपुर सीमा के जंगलों में बड़ी वारदात की फिराक में डेरा डाले हुए हैं। इसके बाद एसडीपीओ भामरागढ़ अमर मोहिते के नेतृत्व में सी-60 की 14 टुकड़ियों को तत्काल जंगल क्षेत्र में रवाना किया गया। 4 फरवरी को सर्च ऑपरेशन के दौरान घात लगाए बैठे माओवादियों ने जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवानों ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान माओवादियों के दो ठिकाने ध्वस्त किए गए और बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद हुई। मैनपुर के जंगल में छिपाए गए हथियार बरामद जिला पुलिस ने मैनपुर के भालूडिग्गी व मटाल पहाड़ियों और जंगल में नक्सलियों के डंप किए हथियार बरामद किए हैं। हथियारों को बरामद करने के लिए ई-30 ऑप्स टीम ने करीब 36 घंटे सर्च अभियान चलाया। 6 स्थानों से 2 इंसास, एक-एक 303 राइफल व देशी कट्टा, एक बीजीएल लांचर, 12 बोर की 2 बंदूक, 02 सिंगल शॉट बंदूक, 127 जिंदा कारतूस, 8 नग मैग्जीन, 22 बीजीएल सेल और बंडल इलेक्ट्रिक वॉयर बरामद किए गए। बीजापुर में 30 और सुकमा में 21 नक्सलियों ने किया सरेंडर, साय बोले-सकारात्मक प्रयास रंग ला रहा छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 30 और सुकमा में 21 माओवादी कैडरों ने राज्य सरकार की पुनर्वास आधारित पहल ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ के अंतर्गत आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों पर कुल 1.61 करोड़ का इनाम था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस घटनाक्रम को बस्तर में शांति स्थापना की दिशा में अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि हथियारों का परित्याग कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था व्यक्त करना यह स्पष्ट संकेत देता है कि सुरक्षा, सुशासन और समावेशी प्रगति ही किसी भी क्षेत्र के दीर्घकालिक भविष्य की मजबूत नींव होते हैं। यह आत्मसमर्पण सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों का ठोस और सकारात्मक परिणाम है।मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते दो वर्षों में बस्तर के दूरस्थ एवं संवेदनशील इलाकों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इन विकासात्मक पहलों ने भटके युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक जीवन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की सुशासन आधारित नीति का केंद्र बिंदु सुरक्षा के साथ-साथ विश्वास, पुनर्वास और भविष्य की संभावनाओं का निर्माण है। आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विज़न, अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा राज्य सरकार के सतत प्रयासों से बस्तर आज भय और हिंसा से निकलकर विश्वास, विकास और नए अवसरों की ओर तेज़ी से अग्रसर हो रहा है।


