शहर और आउटर में अंधेरी सड़कों को ट्रक, हाईवा और डंपर जैसे भारी वाहनों की पार्किंग बना दी गई है। नो एंट्री का समय गुजारने के लिए भारी वाहनों के चालक कहीं भी अपनी सहूलियत देखकर वाहन खड़ा कर रहे हैं। अंधेरे और सामने से आने वाली गाड़ियों की रौशनी में सड़क किनारे खड़े ये भारी वाहन दिखाई नहीं देते और ये वाहन जानलेवा साबित हो रहे हैं। पिछले एक साल में केवल रायपुर में ऐसे सड़क किनारे खड़े वाहनों से टकराकर 14 लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले हफ्ते 8 साल के प्रसित की मौत हो गई। वह अपने माता-पिता के साथ बाइक पर सवार होकर जा रहा था। पिता की बाइक खड़े ट्रक से भिड़ गई। उसे बाद भी प्रशासन और पुलिस ने सड़क किनारे वाहनों की पार्किंग बंद नहीं करवायी है। रविवार और सोमवार की शाम भास्कर ने शहर और आउटर की सड़कों का सर्वे किया। पीछे से टक्कर में सबसे ज्यादा मौत सड़क हादसे में ज्यादातर जान पीछे से टक्कर में जा रही है। पिछले एक साल में पीछे से टक्कर मारने की 124 हादसे हुए है। इसमें 140 लोगों की जान गई है। जबकि 495 लोग गंभीर रूप से घायल हुए है। गाड़ी की साइड से टक्कर की 50 घटनाओं में 52 लोगों की जान गई है। 395 लोग घायल हुए है। यहां होती है अवैध पार्किंग : भाठागांव, पचपेढ़ीनाका, भनपुरी, चंगोराभाठा, खमतराई, रावांभाठा, कबीरनगर, आमानाका इलाके में कतार से खड़े रहते हैं वाहन।


