पुलिस ने लगाई थी एफआर, अब कोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा

आरोपी पर 1 लाख का अर्थदंड भी लगाया भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा पॉक्सो कोर्ट संख्या एक के विशिष्ट न्यायाधीश देवेन्द्रसिंह नागर ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोपी को दोषी करार देते हुए 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। बिजौलिया थाना क्षेत्र में ढाई साल पहले हुए इस मामले में पुलिस ने दुष्कर्म नहीं मानते हुए एक बार एफआर लगा दी थी। इसके बावजूद कोर्ट ने प्रसंज्ञान लेकर ट्रायल शुरू की। अभियोजन पक्ष ने आरोपी को दोषी साबित करते हुए सजा सुनवाई। प्रकरण के अनुसार प्रार्थी ने बिजौलिया थाने में मार्च 2022 में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उसकी नाबालिग बहन घर के बाहर चबूतरे पर बैठकर मंजन कर रही थी। इस दौरान आरोपी आशुतोष पुत्र गोपाल धाकड़ वहां आया और उसकी बहन का मुंह चुन्नी से बंद कर घर के पास स्थित बाड़े में खींचकर ले गया। वहां उससे दुष्कर्म करने के बाद किसी को भी बताने पर जान से मारने की धमकी देते हुए वहां से भाग गया। उसकी नाबालिग बहन घटना के बाद रोती हुई घर आई और डरी-सहमी चुपचाप कमरे में जाकर सो गई। अगले दिन घरवालों ने विश्वास में लेकर पूछा तो उसने घटना के बारे में बताया। पुलिस ने आईपीसी और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया। पुलिस ने नहीं माना था नाबालिग से दुष्कर्म … बिजौलिया पुलिस ने अनुसंधान के दौरान नाबालिग से दुष्कर्म नहीं माना। मामले को झूठा बताते हुए एफआर लगा दी। इसके बावजूद पीड़िता और परिजनों की अपील के बाद पॉक्सो कोर्ट संख्या एक ने प्रसंज्ञान लेकर पत्रावली में ट्रायल दुबारा शुरू की। विशिष्ट लोक अभियोजक धर्मवीरसिंह कानावत ने सुनवाई के दौरान आरोपी आशुतोष धाकड़ के खिलाफ 21 गवाह और 25 दस्तावेज पेश किए। इस आधार पर विशिष्ट न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी करार देते हुए विभिन्न धाराओं में 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही आरोपी को एक लाख रुपए के अर्थदंड से भी दंडित करने का आदेश पारित किया गया।

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