पुल न बनने से छात्र-छात्राओं की जान जोखिम में:रोज बाकड़ी पैरी नाला पार कर जाते हैं स्कूल,4 साल पहले छात्रा की हुई थी मौत

गरियाबंद के बाकड़ी पैरी नाले पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण की मंजूरी मिलने के बावजूद अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। इस कारण आदिवासी छात्र-छात्राओं को कमर तक पानी में उतरकर नाला पार करना पड़ता है। धवलपुर हाई और मिडिल स्कूल में पढ़ने वाले 20 से अधिक छात्र-छात्राओं को रोजाना इस जोखिम का सामना करना पड़ता है। बाकड़ी पैरी नाले के पार कमार जनजाति की बस्ती जानडीह कौर बोडापाला है। यहां के बच्चे गांव से 4 किलोमीटर दूर स्थित धवलपुर स्कूल जाते हैं। जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचते हैं बच्चे बारिश के मौसम में स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर पहले नाला पार करते हैं। फिर 2 किलोमीटर जंगली रास्ता पैदल तय करके स्कूल पहुंचते हैं। जब नाले में पानी का बहाव तेज होता है, तब वे स्कूल नहीं जा पाते। नाला पार करने की हर संभव कोशिश की जाती है, लेकिन असंभव होने पर ही स्कूल से अनुपस्थित रहते हैं। पुल के अभाव में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि आसपास रहने वाले करीब एक हजार लोगों को भी पूरी बरसात में परेशानी झेलनी पड़ती है। 2012 में नाले को पार करते बह गई थी 9वीं की छात्रा इसी नाले में 8 अगस्त 2012 को 9वीं की छात्रा जमुना नेताम ट्यूब से पार करते समय बह गई थी। परिजनों की कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। छात्रा की मौत के 12 साल बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। इस घटना के बाद अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से डरने लगे थे। लेकिन मृतका के भाई हेमसिंह नेताम ने सभी बच्चों को सुरक्षित नाला पार कराने का जिम्मा उठाया। उपसरपंच बाल किशन सोरी के अनुसार, हेमसिंह के साहस के कारण ही आज बच्चे बरसाती नाला पार कर स्कूल जा पाते हैं। हेमसिंह राहत और बचाव के लिए आवश्यक सामान लेकर स्कूल के दिनों में रोजाना छात्रों को सुरक्षित नाला पार कराता है। 6 करोड़ की स्वीकृति, फिर भी अधूरा काम
जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने बताया कि वर्ष 2023 में कांग्रेस सरकार ने बाकड़ी पैरी सहित तीन नालों पर उच्चस्तरीय पुल निर्माण की मंजूरी दी थी। बाकड़ी को छोड़ अन्य दो जगहों पर काम शुरू हो गया है, लेकिन इस नाले पर आज भी काम लंबित है। नेताम ने कहा कि उन्होंने निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए हर स्तर पर पत्राचार किया है। बारिश के बाद शुरू होगा निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग (PWD) के सेतु शाखा के एसडीओ एस.के. पंडोले ने बताया कि पुल निर्माण से पहले डीपीआर तैयार करने के लिए स्थल की गहराई जांच हेतु बोरवेल खुदाई जरूरी है। यह प्रक्रिया दो साल पहले शुरू हुई थी लेकिन बाधाओं के कारण बंद हो गई। फिलहाल बोरवेल के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। बारिश के बाद बोरवेल कार्य पूरा होने के बाद डीपीआर बनेगी और फिर तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण शुरू होगा।

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