महाभारत काल में जिस सोमवती अमावस्या का इंतजार करते-करते पांडव परम धाम पधार गए। उसी सोमवती अमावस्या का कलयुग में विशेष महत्व माना गया है। इसके महत्व को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2024 की आखिरी सोमवती अमावस्या पर अलसुबह से ही श्रद्धालुओं का पवित्र पुष्कर सरोवर के मुख्य घाटों पर तांता लगने लगा। श्रद्धालुओं ने सरोवर के मुख्य घाटों पर तांता लगने लगा। श्रद्धालुओं ने सरोवर में डुबकी लगाकर पूजा अर्चना की। दिनभर सरोवर के तट पर पितृ कार्य और धार्मिक अनुष्ठान चलते रहे। सोमवती अमावस्या पर हजारो ने लगाई पुष्कर सरोवर में आस्था की डुबकी करोड़ो लोगों की आस्था के केन्द्र पुष्कर सरोवर में सोमवार को सोमवती अमावस्या के मौके पर विशेष धार्मिक स्नान संपन्न हुआ। इस दौरान अनेक श्रद्धालुओ ने अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्म शांति के लिए तर्पण व पिंडदान भी किये ।पंडित सतीश डोल्या ओर दिलीप शास्त्री ने बताया कि अमावस्या के दिन सोमवार आने पर सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग बनता है इस मौके पर तीर्थ में स्नान का विशेष महत्व है। इसी के चलते आज सुबह से ही श्रद्धालुओं को पवित्र सरोवर में स्नान करना शुरू कर दिया जो शाम तक जारी रहा।उन्होंने बताया कि स्नान के बाद श्रद्धालुओ ने सरोवर की परिक्रमा कर जगत पिता ब्रह्मा मंदिर समेत देव दर्शन किये। साथ ही अपने पूर्वजों की आत्म शांति के लिए तर्पण कर्म किट और पुरोहितों को दान दक्षिणा देकर धर्मलाभ कमाया । भगवान राम ने भी दिया था पिंडदान पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार त्रेता युग में भगवान राम ने अपने पिता दशरथ को इसी तीर्थ में पिंडदान दिया था। मृत्यु लोक के पांच प्रमुख शहरों में से एक पुष्कर सरोवर पित्र कार्य के लिए उत्तम माना जाता है। इन्हीं मान्यताओं के चलते सरोवर के 52 घाटों पर दिनभर श्रद्धालुओं का मेला लगा रहा। वहीं मंदिरों और बाजारों में भी दिनभर रौनक बनी रही। (इनपुट-अभिषेक शर्मा, पुष्कर)


