सिटी रिपोर्टर | बोकारो पुस्तकालय मैदान, सेक्टर-5 बोकारो में बीएसएल तथा अखिल भारतीय चेतना दर्पण के संयुक्त प्रयास से एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि बीएसएल के महाप्रबंधक (संपर्क एवं प्रशासन) चौधरी रत्नेश कुमार सुधांशु ने कहा कि साहित्यकारों के कंधे पर समाज की दिशा तय करने का दायित्व होता है। जिसे साहित्यकारों ने सामयिक तरीके से सफलतापूर्वक अपने दायित्व का निर्वहन किया है। समय-समय पर साहित्यकार, कवि और रचनाकार अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्र और समाज की सेवा करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि बोकारो महानगर के साहित्य प्रेमियों के लिए यह आयोजन बोकारो पुस्तकालय प्रांगण में प्रत्येक माह के तीसरे गुरुवार को शाम 4 बजे से आयोजित किया जाएगा। विशिष्ट अतिथि बेरमो एसडीएम मुकेश मछुआ ने कवियों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए अपनी कविता कवियों का एक सम्मेलन देखा तथा ज्ञान कथा का सागर मंचन देखा को प्रस्तुत किया। कहा कि बीएसएल साहित्यकारों को मंच उपलब्ध कराकर बहुत ही अनुकरणीय कार्य कर रहा है। संपर्क एवं प्रशासन विभाग के मानस चंद्र रजवार (सहायक प्रबंधक) ने भी कवियों के कृतप्रयत्नो की सराहना की। कार्यक्रम की अध्यक्षता चेतना दर्पण के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र कुमार राय ने की। कहा कि बीएसएल ने बोकारो में रहने वाले साहित्यकारों व कवियों को मंच प्रदान कर हिंदी साहित्य के क्षेत्र में सीखने- सिखाने का एक वातावरण तैयार किया है। कवियों ने अपनी रचनाओं से लोगों को किया मंत्रमुग्ध कार्यक्रम का शुभारंभ गंगेश पाठक ने सरस्वती वंदना “मां शारदे वर दे” से किया। डॉ ने हिंदी यह अपनी भाषा-मीठी प्यारी है भाषा, गीता गुस्ताख ने मेरी यादों के पन्ने पर, रेणुका सिन्हा ने मानवता का अमर संदेश, सोनी कुमारी ने सात फेरे, ऋचा प्रियदर्शनी ने मैं बेटी हूं, डॉ. आशा पुष्प ने आवाज मेरे दिल की, पद्मावती कोमल ने वर्तमान समाज, अमृता शर्मा ने जब राम रोए, कस्तूरी सिन्हा ने दायरों में जिंदगी बंद कर कहीं ना रह जा, लव कुमार ने पेंसिल की आत्मकथा, कृपानंद सिन्हा ने भगवान तू ना बदला, करुणा कालिका ने छुपा कर नजर में नजर देखिएगा, रिंकू गिरि ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, संजू गिरि ने मंजिल रास्ता देख रही है सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।


