रांची नगर निगम में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां वीआईपी और पैरवी-पहुंच वालों के लिए अलग नियम है तो आम लोगों के लिए अलग। इसी का नतीजा है कि निगम के जन्म-मृत्यु शाखा के तत्कालीन डिप्टी रजिस्ट्रार विश्वंभर भगत ने अपने हस्ताक्षर से करीब 900 प्रमाण पत्र बना दिए। इसमें कई प्रमाण पत्रों का आवेदन ही नहीं है। अब इन सभी प्रमाण पत्रों की जांच होगी। भगत द्वारा बनाए गए प्रमाण पत्रों की सूची तैयार की जा रही है। दरअसल हाल ही में आईएएस अधिकारी राजीव रंजन के बेटे का तीन जन्म प्रमाण पत्र सामने आया था, जिसमें जन्म की तिथि अलग-अलग थी। इसका खुलासा होने के बाद निगम ने पुरानी फाइलों को खंगाला तो चौंकाने वाली बात सामने आई। -शेष पेज 15 पर अफसरों के निर्देश पर फैसला लेना पड़ता है आईएएस अधिकारी फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट होते हैं। उनके निर्देश पर कई बार फैसला लेना पड़ता है। अधिकारी के बेटे का जन्म प्रमाणपत्र किस आधार पर बना था, मुझे याद नहीं। अगर दो या तीन सर्टिफिकेट बन भी गया तो उसे रद्द करने का प्रावधान भी है। जहां तक पूर्व में सर्टिफिकेट जारी करने की बात है तो मैं इसके लिए अधिकृत था। मैंने किसी का गलत सर्टिफिकेट नहीं बनाया। -विश्वंभर भगत, पूर्व डिप्टी रजिस्ट्रार,जन्म-मृत्यु निबंधन गड़बड़ी सामने आने पर अधिकारी जांच करते हैं डिप्टी रजिस्ट्रार को पूर्व में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार प्राप्त था। इसका लॉगिन-आईडी भी बनाया गया था। इसलिए डिप्टी रजिस्ट्रार ने प्रमाणपत्र जारी किया तो उसमें कोई गलत नहीं है। लेकिन बिना कागजात के प्रमाणपत्र बनाया गया है तो यह गलत है। ऐसा मामला सामने आने पर निगम के वरीय अधिकारी इसकी जांच करते ही हैं। -संदीप कुमार सिंह, प्रशासक वीआईपी के लिए सिर्फ अनुशंसा ही काफी: नगर निगम में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नियम बने हुए हैं। सभी को उसी नियम के तहत आवेदन करना पड़ता है। तभी प्रमाण पत्र बनता है। लेकिन वीआईपी और पैरवी-पहुंच वालों के लिए कोई नियम नहीं है। सिर्फ अनुशंसा के आधार पर ही इनका प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। या फिर निगम के ही पदाधिकारी अपने स्तर से कागजात का जुगाड़ कर प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं। लेकिन आम लोगों के मामले में ऐसा नहीं होता। कागजात में जरा सी भी त्रुटि रहने पर उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ती है। जन्म प्रमाण पत्र बनाने का यह है नियम बच्चे के जन्म से 30 दिनों के अंदर निगम में आवेदन देने पर जन्म प्रमाण पत्र तुरंत बन जाता है। इसके लिए किसी तरह की मशक्कत नहीं करनी पड़ती है। बच्चे के जन्म के 30 दिनों से एक साल के अंदर प्रमाण पत्र का आवेदन देने पर साथ में शपथपत्र देना पड़ता है। कई बार घर में जन्म दिखाने पर आंगनबाड़ी सेविका से सत्यापित आवेदन देना पड़ता है। निगम से ऐसे आवेदनों को जिला सांख्यिकी कार्यालय में जांच के लिए भेजा जाता है। वहां से गवाही के बाद निगम प्रमाणपत्र जारी होता है। बच्चे के जन्म के एक साल होने के बाद आवेदन करने पर शपथपत्र, अस्पताल का मूल प्रमाणपत्र के साथ आवेदन देना होता है। घर में जन्म दिखाने पर आंगनबाड़ी सेविका से सत्यापित फॉर्म, दो गवाह के आधार कार्ड के साथ आवेदन करना पड़ता है। निगम से ऐसे आवेदन एसडीओ के यहां गवाही के लिए भेजे जाते हैं। वहां कार्यपालक दंडाधिकारी के समक्ष गवाही कराई जाती है। इसके बाद निगम से प्रमाणपत्र जारी होता है। इस प्रक्रिया में एक माह से अधिक का समय लगता है।


