पूर्व विधायक बलजीत यादव ने 2.87 करोड़ की थी हेरफेर:MLA-LAD फंड डायवर्ट कर रिश्तेदारों को दिए, प्रॉपर्टी खरीदने में भी किया था यूज

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पूर्व विधायक बलजीत यादव को अरेस्ट कर पूछताछ की जा रही है। PMLA के तहत आगे की जांच के लिए विधायक बलजीत यादव तीन दिन ईडी की कस्टडी में है। MLA-LAD फंड में बलजीत यादव ने 2.87 करोड़ की हेरफेर कर रिश्तेदारों को डायवर्ट कर दिए थे। फंड का कुछ हिस्सा प्रॉपर्टी खरीदने में यूज किया गया था। ईडी अधिकारियों ने बताया- राजस्थान के बहरोड़ विधानसभा के पूर्व विधायक बलजीत यादव को मंगलवार रात अरेस्ट किया गया था। यह कार्रवाई विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि के दुरुपयोग से जुड़े (क्रिकेट और बैडमिंटन किट घोटाले) में हुई, जिसमें सरकारी स्कूलों को घटिया खेल सामग्री आपूर्ति के आरोप पर की गई। दिसम्बर-2024 में दर्ज FIR के आधार पर ईडी की ओर से जांच शुरू की गई थी। 24 जनवरी-2025 को जयपुर और दौसा (राजस्थान) और रेवाड़ी (हरियाणा) में 9 जगहों पर PMLA-2002 के नियमों के तहत सर्च ऑपरेशन किया गया। जिसमें पूर्व विधायक बलजीत यादव और उससे जुड़े लोगों/कंपनियों से जुड़ी जगहों को कवर किया गया था। सर्च ऑपरेशन के दौरान 31 लाख रुपए कैश, फेक डॉक्यूमेंट्स, रिकॉर्ड और कई डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए, जिनसे MLA-LAD फंड की लॉन्ड्रिंग के बारे में जरूरी सबूत मिले। उनके कार्यकाल के दौरान MLA-LAD फंड के गबन से जुड़ी चल रही जांच के सिलसिले में बलजीत यादव को ईडी की ओर से मंगलवार शाम राउंडअप किया गया था। ईडी जांच में मिले कई सबूत
ईडी की जांच से पता चला है कि बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र से बलजीत यादव का विधायक कार्यकाल (2018 से 2023) था। अपने कार्यकाल के दौरान 2.87 करोड़ रुपए की MLA-LAD फंड की हेराफेरी में विधायक रहे बलजीत यादव मेन मास्टर माइंड (मुख्य साजिशकर्ता) थे। विधायक बलजीत यादव ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के 32 स्कूलों के लिए खेल सामग्री की खरीद की सिफारिश की। अपने सहयोगियों के साथ मिलीभगत करके मेसर्स बालाजी कम्प्लीट सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को शामिल किया। मेसर्स सूर्या एंटरप्राइजेज लिमिटेड, मेसर्स राजपूत स्पोर्ट्स एंटरप्राइजेज लिमिटेड और मेसर्स शर्मा स्पोर्ट्स एंटरप्राइजेज लिमिटेड के कर्मचारियों/सहयोगियों की ID का यूज करके ये कंपनियां बनाई गईं। इन कंपनियों को स्पोर्ट्स इक्विपमेंट की ट्रेडिंग का कोई पहले का अनुभव नहीं था। इन्हें अलवर की जिला परिषद से एडमिनिस्ट्रेटिव और फाइनेंशियल अप्रूवल के बाद शामिल किया गया था। कॉम्पिटिशन को रोकने और इन कंपनियों को टेंडर देने के लिए तय नियमों को तोड़कर टेंडर जारी किए गए। इसके अलावा घटिया क्वालिटी का सामान कैश में खरीदा गया। नीमराना पंचायत समिति को बढ़ा-चढ़ाकर भेजे बिलों को मंजूरी दे दी गई। बैंक अकाउंट एनालिसिस से पता चला कि मिले फंड बलजीत यादव के रिश्तेदारों/सहयोगियों को डायवर्ट कर दिए गए थे। फंड का कुछ हिस्सा उनके नाम पर प्रॉपर्टी खरीदने में यूज किया गया। जिसे बाद में बेचकर कंपनियों को वापस कर दिया गया और ज्यादातर कैश में निकाला गया।

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