पूर्व सभापति पुत्र के अवैध परिसर हटाने के निर्देश:नगर परिषद ने दिया 4 दिन का नोटिस, सैटबैक सहित कई गंभीर अनियमितताएं मिलीं

करौली शहर में ऑनलाइन गेमिंग सट्टा और नव संवत्सर रैली के दौरान पथराव-दंगे के मामले में गिरफ्तारी के बाद प्रशासन ने नगर परिषद की पूर्व सभापति के पुत्र के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। नगर परिषद ने अंबेडकर चौराहा स्थित उनके नवनिर्मित परिसर को अवैध बताते हुए चार दिन में हटाने का अल्टीमेटम जारी किया है। ऑनलाइन गेमिंग सट्टा और नव संवत्सर रैली के दौरान हुई हिंसा के मामले में गिरफ्तारी के बाद पूर्व नगर परिषद सभापति के पुत्र अमीनुद्दीन खान पर प्रशासनिक शिकंजा कसता नजर आ रहा है। करौली नगर परिषद ने अंबेडकर चौराहा स्थित उनके नवनिर्मित परिसर को लेकर अवैध निर्माण और अतिक्रमण का नोटिस जारी किया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि चार दिवस की अवधि में अवैध निर्माण स्वयं हटाया जाए, अन्यथा नगर परिषद द्वारा नियमानुसार तोड़फोड़ की कार्रवाई की जाएगी। नगर परिषद द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, जांच में भवन निर्माण स्वीकृत नियमों के विपरीत पाया गया है, जिसमें सैटबैक सहित कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कार्यवाहक आयुक्त एवं एसडीएम प्रेमराज मीणा ने बताया कि नियत समय में अतिक्रमण नहीं हटाने पर नगर परिषद सख्त कार्रवाई अमल में लाएगी। इस मामले में आरटीआई कार्यकर्ता अशोक पाठक ने भी नगर परिषद आयुक्त को विस्तृत शिकायत सौंपी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अंबेडकर पार्क भट्टा के निकट स्थित अमीनुद्दीन पुत्र मइनुद्दीन का होटल अवैध रूप से निर्मित है तथा इसके लिए जारी किए गए पट्टे विधि विरुद्ध हैं। शिकायत के अनुसार, पूर्व में बिना सैटबैक और बिना स्वीकृति के बने करीब 38 दुकानों व मकानों को नगर परिषद ने सीज किया था, जबकि इस प्रकरण में कथित तौर पर भेदभाव बरता गया। अशोक पाठक का कहना है कि अतिरिक्त जिला कलेक्टर करौली की जांच रिपोर्ट, राज्य सरकार और संभागीय आयुक्त कोटा के निर्णयों में भी पट्टों को अवैध माना जा चुका है। इसी मामले में पद के दुरुपयोग का दोष सिद्ध होने पर तत्कालीन सभापति रशीदा खातून को निलंबित किया गया था, जिसकी अपील राजस्थान उच्च न्यायालय जयपुर ने भी खारिज कर दी थी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अवैध होटल निर्माण के दौरान प्राचीन शिव मंदिर का रास्ता बंद कर दिया गया, साथ ही रियासतकालीन चारदीवारी और बुर्ज पर भी कब्जा किया गया। गिरफ्तारी के बाद प्रशासनिक सख्ती बढ़ने से शहर में इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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