छत्तीसगढ़ के पेंड्रा में बाईपास सड़क का निर्माण मुआवजा राशि की स्वीकृति नहीं मिलने से अटका हुआ है। यह प्रोजेक्ट 2016 में मंजूर हुआ था। इसके लिए 54.25 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने 2018 में इस सड़क का भूमिपूजन किया था। लेकिन भूमि अधिग्रहण के दस्तावेज पूरे नहीं होने से काम शुरू नहीं हो पाया। इसी बीच विधानसभा चुनाव आ गए। कांग्रेस ने किया था वादा 2018 में कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया था कि सरकारी प्रयोजन के लिए भूमि अधिग्रहण पर शासकीय मूल्य का 4 गुना मुआवजा दिया जाएगा। भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह नियम लागू भी किया गया। इससे बाईपास सड़क की लागत बढ़ गई। मुआवजा राशि नहीं मिलने से निरस्त विभाग ने कई बार शासन को इसकी जानकारी भेजी, लेकिन मुआवजा राशि का आवंटन नहीं किया गया। इसके बाद मरवाही विधानसभा उपचुनाव के दौरान कांग्रेस सरकार ने निविदा प्रकाशित कराई, लेकिन मुआवजा राशि नहीं मिलने से वह निरस्त हो गई। भारी और छोटे वाहनों का दबाव 13 किलोमीटर लंबी यह सड़क नहीं बनने से शहर में भारी और छोटे वाहनों का दबाव बना रहता है। इससे हादसे भी होती हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। वर्तमान भाजपा सरकार ने भी अभी तक मुआवजा राशि स्वीकृत नहीं की है। तत्काल राशि आवंटित करने की मांग रविवार को एक हादसे में युवा व्यवसायी अंकित अग्रवाल की मौत के बाद पेंड्रा बाईपास के लिए राशि आवंटन करने की मांग जनता के बीच फिर से जोर पकड़ ली है। नागरिकों की मांग है कि सरकार को तत्काल राशि आवंटित करनी चाहिए, जिससे कि सड़क का निर्माण जल्द से जल्द हो सके। मरवाही विधानसभा क्षेत्र के गांवों अमरपुर, भदौरा, सेमरा, बंधी, अड़भार, कुड़कई के किसानों की भूमि का भी अधिग्रहण होना है और इन गांवों के लोगों को भी बाईपास सड़क बनने का लाभ मिलना है। 2018 में निविदा निरस्त लेकिन 2018 में कांग्रेस सरकार आने के बाद लोक निर्माण विभाग ने निविदा को निरस्त कर दिया था। इसके बाद से ही पेंड्रा बाईपास सड़क निर्माण का काम आज भी अटका हुआ है।


