सामाजिक सुरक्षा पेंशन के खातों में बड़ी बैंकिंग धांधली उजागर हुई है। ईओडब्ल्यू भोपाल ने बैंक ऑफ इंडिया के दो कर्मचारियों समेत कुल 7 लोगों पर केस दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फिनैकल सिस्टम का दुरुपयोग करते हुए 212 निष्क्रिय (डॉरमैंट) खातों को अवैध तरीके से एक्टिव किया और एटीएम कार्ड से तीन साल में 44.11 लाख रुपए निकाल लिए। यह गड़बड़ी जनवरी 2016 से मार्च 2019 के बीच की है। जांच के अनुसार, बैंक के विशेष सहायक दीपक जैन और स्टाफ क्लर्क अजय सिंह परिहार ने विभागीय नियमों को दरकिनार कर अपने स्तर पर ही खाते सक्रिय किए और एंट्री व वेरिफिकेशन भी खुद करते रहे। सरकारी पेंशन और राहत राशि को उन्होंने चार परिचितों-खुशबू खान, कल्पना जैन, ललिता ठाकुर और अफरोज खान के खातों में ट्रांसफर किया। इन खातों के एटीएम कार्ड दीपक जैन के पास थे। आरोपियों ने निकाली गई राशि को 70:30 के अनुपात में आपस में बांट लिया। निष्क्रिय खाते: वह खाता जिसमें 12 माह से लेनदेन न हो। ग्राहक इसे KYC व वेरिफिकेशन कर सक्रिय कर सकता है। जांच रिपोर्ट, फिनैकल लॉग, ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, एटीएम निकासी विवरण व ऑडिट ट्रेल ने गबन की पुष्टि कर दी। ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आए अहम बिंदू:
– 212 डॉरमैंट खाते अवैध तरीके से एक्टिव किए गए
– 64 खाते सहकर्मियों की आईडी का दुरुपयोग कर दीपक जैन ने खुद सक्रिय किए
– रकम चार परिचितों के खातों में भेजी गई, एटीएम कार्ड दीपक जैन के पास थे
– दीपक जैन और पत्नी हेमलता जैन के खातों में संदिग्ध बड़ी रकम मिली
– अजय परिहार के खातों में भी भारी रकम के लेनदेन उजागर
– बैंक की एसओपी व सुपरवाइजरी कंट्रोल की गंभीर अवहेलना इन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर: ईओडब्ल्यू ने जांच में मिले तथ्यों के आधार पर सातों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। टीम ने उन्हें धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक साजिश, पहचान/डेटा का दुरुपयोग व साइबर फ्रॉड की धाराओं में आरोपी बनाया है। एफआईआर में दीपक जैन, अजय सिंह परिहार, खुशबू खान, अफरोज खान, ललिता ठाकुर, कल्पना जैन और हेमलता जैन नामजद हैं। ईओडब्ल्यू ने अन्य संभावितों को भी सह आरोपी मानते हुए जांच शुरू कर दी है। 2019 में हुई थी शिकायत
मार्च 2019 में सैफिया कॉलेज ब्रांच में भगवती देवी नामक महिला ने अपने मृत पति के खाते से अवैध निकासी की शिकायत दर्ज करवाई थी। आंतरिक जांच में ट्रांजैक्शन दीपक जैन और अजय परिहार से जुड़ा मिला। इसके बाद बैंक विजिलेंस व विभागीय जांच में बड़े स्तर पर अनियमितताएं उजागर हुईं।


