पेट दर्द के साथ युवक पहुंचा एम्स, निकला जानलेवा रोग:महाधमनी की सूजन से खराब हुई किडनी, 10 डॉक्टरों ने 6 घंटे में खराब हिस्सों को हटा लगाई 3 नई नसें

आमतौर पर पेट दर्द को लोग गैस, अपच या सामान्य संक्रमण मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कभी-कभी यही मामूली दिखने वाला दर्द जानलेवा बीमारी का संकेत भी हो सकता है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला भोपाल स्थित एम्स से सामने आया है, जहां आठ महीने से पेट दर्द से जूझ रहा 35 वर्षीय युवक जांच में एक बेहद गंभीर और दुर्लभ बीमारी से पीड़ित पाया गया। मरीज की पेट की मुख्य खून की नली, जिसे महाधमनी कहा जाता है, उसमें खतरनाक सूजन आ चुकी थी। यह सूजन इतनी बढ़ गई थी कि आंतों और दोनों किडनियों को खून पहुंचाने वाली नसें इसकी चपेट में आ गईं। हालत यह थी कि मरीज की बाईं किडनी पूरी तरह खराब हो चुकी थी और किसी भी समय महाधमनी फटने का खतरा था, जिससे जान जा सकती थी। एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने समय रहते छह घंटे चली जटिल सर्जरी कर न सिर्फ मरीज की जान बचाई, बल्कि उसे नया जीवन भी दिया। समय के साथ पेट दर्द बढ़ता गया
मरीज पिछले करीब आठ महीनों से लगातार पेट दर्द की शिकायत कर रहा था। शुरुआत में दर्द हल्का था, लेकिन समय के साथ यह बढ़ता चला गया। कई अस्पतालों में इलाज कराया गया, दवाएं बदली गईं, जांचें हुईं, लेकिन असली कारण सामने नहीं आ सका। जब दर्द असहनीय होने लगा और शरीर पर असर दिखने लगा, तब मरीज एम्स भोपाल पहुंचा। यहां विस्तृत जांच के बाद डॉक्टरों को पता चला कि मामला सामान्य पेट दर्द का नहीं, बल्कि शरीर की सबसे बड़ी रक्त नली से जुड़ा है। पेट की महाधमनी का रोग खतरनाक
मानव शरीर में महाधमनी (Aorta) सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण रक्त नली होती है, जो हृदय से पूरे शरीर में शुद्ध रक्त पहुंचाती है। पेट के हिस्से में मौजूद महाधमनी को एब्डॉमिनल एऑर्टा कहा जाता है। जांच में सामने आया कि मरीज को सुप्रा-रीनल एब्डॉमिनल एऑर्टिक एन्यूरिज्म था, यानी किडनियों से ऊपर वाली महाधमनी में असामान्य सूजन। यह सूजन गुब्बारे की तरह फैल चुकी थी और कभी भी फट सकती थी। अगर ऐसा होता, तो मरीज की मौके पर ही मौत हो सकती थी। डॉक्टरों ने पाया कि सूजन सिर्फ महाधमनी तक सीमित नहीं थी, बल्कि आंतों और दोनों किडनियों को खून पहुंचाने वाली नसों तक फैल चुकी थी। बाईं किडनी पूरी तरह काम करना बंद कर चुकी थी। इसका मतलब था कि शरीर से विषैले पदार्थ बाहर नहीं निकल पा रहे थे। अगर समय रहते इलाज न होता, तो दाईं किडनी भी खतरे में पड़ सकती थी। सर्जरी ही थी एकमात्र रास्ता
एम्स भोपाल के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग के विशेषज्ञों ने मरीज की स्थिति को देखते हुए तुरंत सर्जरी का फैसला लिया। यह सर्जरी बेहद जोखिम भरी थी, क्योंकि इसमें पेट और छाती दोनों हिस्सों से ऑपरेशन करना था। डॉक्टरों के सामने सूजनग्रस्त महाधमनी को हटाना, उसकी जगह आर्टिफिशियल रक्त नली लगाना, खराब हो चुकी किडनी को निकालना और आंतों व दाईं किडनी को नई नसों से जोड़ना की चुनौती थी। छह घंटे चली जटिल सर्जरी
करीब छह घंटे तक चली इस सर्जरी में डॉक्टरों ने सूजनग्रस्त महाधमनी को पूरी तरह हटाकर उसकी जगह ग्राफ्ट (कृत्रिम रक्त नली) लगाया। इसके बाद आंतों और दाईं किडनी को रक्त पहुंचाने वाली प्रमुख धमनियों को इसी ग्राफ्ट से जोड़ा गया। यानी शरीर में तीन नए “रास्ते” बनाए गए, ताकि रक्त का प्रवाह सामान्य बना रहे। साथ ही, संक्रमण और अन्य जोखिमों को रोकने के लिए खराब हो चुकी बाईं किडनी को भी निकालना पड़ा। सर्जरी के बाद मरीज को आईसीयू में रखा गया। शुरुआती 24 से 48 घंटे बेहद अहम थे, क्योंकि इस दौरान किसी भी तरह की जटिलता जानलेवा हो सकती थी। डॉक्टरों की सतत निगरानी में मरीज की हालत स्थिर रही। धीरे-धीरे सुधार हुआ और बाद में उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रहा है। 10 डॉक्टरों की टीम ने की सर्जरी
यह जटिल सर्जरी सीटीवीएस विभाग के प्रमुख डॉ. योगेश निवारिया के नेतृत्व में की गई। सर्जिकल टीम में डॉ. एम. किशन, डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव, डॉ. राहुल शर्मा, डॉ. विक्रम वट्टी और डॉ. आदित्य सिरोही शामिल रहे। इसके अलावा यूरोलॉजी विभाग से डॉ. माधवन और डॉ. केतन मेहरा, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. हरीश और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग से डॉ. अंकित जैन ने भी अहम भूमिका निभाई। यह टीमवर्क ही मरीज के जीवन रक्षक इलाज की सबसे बड़ी वजह बना। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक बना रहने वाला पेट दर्द, पीठ दर्द या अचानक कमजोरी जैसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर पर अगर दर्द दवाओं से ठीक न हो, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। महाधमनी से जुड़ी बीमारियां शुरुआत में मामूली लग सकती हैं, लेकिन समय पर पहचान न हो तो जानलेवा साबित होती हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *