पूर्व नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता अमर बाउरी ने पेसा नियमावली को छलावा बताया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने रूढ़िवादी जनजातीय परंपराओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया है। जिसके कारण ऐसे लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है, जिनका इस वर्ग से कोई संबंध नहीं है। यह आदिवासी समाज के अधिकारों के साथ अन्याय है। वहीं, वन उपज, खनिज संसाधन एवं जल स्रोतों पर ग्राम सभा को नियंत्रण देने के बजाय सरकार और जिला अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण अधिकार अपने पास ही सुरक्षित रखे हैं। यह ग्राम सभा की संवैधानिक शक्तियों को सीधे-सीधे कुंठित करने का प्रयास है। आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक मंच पर भाजपा का संघर्ष जारी रहेगा।


