झारखंड के 4298 पैक्स अध्यक्षों (अधिप्राप्ति केंद्रों) ने धान खरीदारी में 111 करोड़ रुपए की हेराफेरी की है। गड़बड़ी िपछले 11 वर्षों से हो रही है। 2011-12 से 2022-23 तक पैक्सों ने किसानों से धान लिया, लेकिन यह सरकार तक नहीं पहुंचा। झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) सत्येंद्र कुमार ने मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने सभी जिला प्रबंधकों को निर्देश दिया है कि दो दिनों के अंदर पैक्स अध्यक्षों पर केस दर्ज करें। नीलामपत्र वाद दायर करते हुए कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराएं। ऐसा नहीं करने की स्थिति में जिला प्रबंधक ही जिम्मेवार होंगे। चतरा के जिला सहकारिता पदाधिकारी लोकनाथ महतो ने कहा कि पैक्सों से राशि वसूलने के लिए जिला आपूर्ति पदाधिकारी को पत्र मिला है। उस पर कार्रवाई की जा रही है। राज्य खाद्य निगम के एमडी का निर्देश- दो दिनों में दर्ज करें केस 7 बार पत्र लिख चुके एमडी, पर एक्शन नहीं: पैक्सों से राशि वसूलने और उन पर कार्रवाई के लिए प्रबंध निदेशक सात बार जिला प्रबंधकों को पत्र लिख चुके हैं, पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रबंध निदेशक ने 2022 में 26 अप्रैल, 20 मई, 3 जून, 25 जून, 21 सितंबर और 2024 में 9 मई को पत्र लिखकर निर्देश दिया था। 11 दिसंबर 2024 को भी वे सख्त निर्देश जारी कर चुके हैं। प्रबंध निदेशक सत्येंद्र कुमार के अनुसार, पैक्सों से 125 करोड़ रुपए वसूले जाने हंै। इसके एवज में पैक्सों ने मात्र 14 करोड़ रुपए ही जमा कराया है। उन्होंने 111 करोड़ रुपए नहीं दिया है। हर हाल में यह राशि वसूल की जाएगी। नहीं देने वालों पर केस दर्ज कर कानूनी कार्रवाई होगी। जिला प्रबंधकों ने वसूली, कार्रवाई का ब्योरा नहीं दिया एमडी ने जिला प्रबंधकों से कहा है कि पैक्स जितना धान किसानोंं से लेते हैं, उतना राइस मिल को नहीं देते हैं। पैक्स में ही धान रह जाता है, इसलिए पैक्स पर केस दर्ज करते हुए नीलामपत्र वाद और मनीसूट दायर करें। उन्होंने कहा कि राज्य में सरकारी दर पर धान की खरीदारी पैक्स के माध्यम से होती है। किसानों से खरीदा गया धान राइस मिल को उपलब्ध कराया जाता है। पर 4298 पैक्स अध्यक्षों ने राइस मिल को धान उपलब्ध नहीं कराया और न ही उसकी कीमत जमा की गई।


