राज्य सरकार की ओर से सरकारी नौकरी की सिफारिश किए जाने के बाद भी पैरा एथलीट खिलाड़ी को करीब दो साल तक नियुक्ति नहीं देने के मामले में बुधवार को वित्त सचिव (रेवेन्यू) कुमार पाल गौतम हाईकोर्ट में पेश हुए। जस्टिस अशोक कुमार जैन की अदालत ने वित्त सचिव से कहा कि अगर आपने कोर्ट को किसी काम के लिए आश्वस्त किया है तो वह काम होना चाहिए। लेकिन यहां उल्टा हो रहा है। कोर्ट को आश्वस्त करने के बाद भी याचिकाकर्ता को नियुक्ति नहीं दी गई। वित्त सचिव ने याचिकाकर्ता को नियुक्ति देने की प्रक्रिया को पूरी करने के लिए कुछ समय मांगा है। इस पर अदालत ने समय देते हुए 15 दिसंबर तक सुनवाई टाल दी है। वित्त सचिव-आबकारी आयुक्त को किया था तलब
अधिवक्ता तनवीर अहमद ने बताया कि हाईकोर्ट ने पैरा एथलीट खिलाड़ी निहाल सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए वित्त सचिव और आबकारी आयुक्त को पिछली सुनवाई पर तलब किया था। आज वित्त सचिव पेश हुए। वहीं आबकारी आयुक्त की ओर से हाजिरी माफी पेश की गई। उन्होने बताया कि राज्य सरकार ने 29 सितंबर 2023 को 2023-24 की रिक्तियों के विरुद्ध याचिकाकर्ता की सहायक आबकारी अधिकारी (निवारक) के पद पर नियुक्ति की सिफारिश की थी। याचिकाकर्ता ने स्वर्ण पदक सहित 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पदक जीते 11 अक्टूबर 2023 को आबकारी विभाग को चयन पत्र भेजने के बाद भी याचिकाकर्ता को दो साल में नियुक्ति नहीं दी गई हैं। जबकि याचिकाकर्ता पेरिस पैरालिंपिक 2024, एशियाई पैरा गेम्स 2023 और कई विश्व पैरा शूटिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुका है। विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक सहित 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं। दिव्यांगजन-योग्य पदों की पहचान नहीं
उन्होने बताया कि विभाग ने राज्य दिव्यांगजन आयुक्त के सामने यह स्वीकार किया कि पिछले 3 साल से आबकारी विभाग में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत दिव्यांगजन योग्य पदों की पहचान प्रक्रिया नहीं की गई। याचिकाकर्ता के प्रार्थना-पत्र पर राज्य दिव्यांगजन आयुक्त ने 12 नवम्बर 2024 को विस्तृत आदेश पारित करते हुए आबकारी विभाग को निर्देशित किया कि वह याचिकाकर्ता को समस्त परिणामी लाभ देते हुए नियुक्ति आदेश जारी करें। वहीं कानून की अनुपालना में दिव्यांगता-योग्य पदों की तुरंत पहचान करें। लेकिन विभाग ने वैधानिक रूप से बाध्यकारी होने के बावजूद, आबकारी विभाग के आदेश की अवहेलना और अनदेखी की है। भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया गया
याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता की तरह स्थिति वाले अन्य पैरा-एथलीट अवनि लेखरा, सुंदर गुर्जर और देवेंद्र झाझड़िया को 2017 के नियमों के तहत एसीएफ के पद पर नियुक्ति की अनुशंसा की गई थी। जिन्हें पहले ही नियुक्ति मिल चुकी है। जबकि उस समय वह पद भी दिव्यांगजनों के लिए निर्धारित नहीं था। लेकिन याचिकाकर्ता के विरुद्ध भेदभावपूर्ण निष्क्रियता समानता के अधिकार का उल्लंघन है।


