राजस्थान हाईकोर्ट ने पॉक्सो से जुड़े संवेदनशील मामलों की जांच को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को तलब किया है। अदालत ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि पॉक्सो जैसे गंभीर अपराधों में जांच अधिकारी का अनुभव और पद अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। वहीं सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य आया कि मामले में दुष्कर्म से जुड़ा वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद भी पुलिस ने मामले की जांच एसआई स्तर के अधिकारी को सौंप दी। वहीं वीडियो वायरल पर भी आईटी एक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई नहीं की। जस्टिस समीर जैन की अदालत ने डीजीपी को 2 दिसंबर को व्यक्तिगत अथवा वीसी के जरिए कोर्ट में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह आदेश आरोपी नितिन की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। डीजीपी स्पष्टीकरण दें कि पॉक्सो मामलों में उचित अधिकारियों को जांच क्यों नहीं दी रही
अदालत ने कहा- ऐसे मामलों में पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर) अथवा उससे ऊपर के अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, ताकि निष्पक्ष और सक्षम जांच हो सके। लेकिन इस मामले में वीडियो वायरल होने और सार्वजनिक चर्चा का विषय बनने के बावजूद जांच निचले स्तर के अधिकारी द्वारा की गई। ऐसे में डीजीपी कोर्ट में पेश होकर स्पष्टीकरण दें कि पॉक्सो जैसे अत्यंत संवेदनशील मामलों में जांच उचित स्तर के अधिकारियों को क्यों नहीं सौंपी जा रही है। आरोपी ने लगाई थी जमानत याचिका
नाबालिग से दुष्कर्म करने के मामले में बहरोड़ सदर थाना पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद आरोपी ने ट्रायल कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी।


