राजधानी रायपुर के सेंट्रल जेल में रविवार शाम करीब 6 बजकर 45 मिनट पर पॉक्सो के मामले में बंद एक विचाराधीन कैदी सुनील महानंद ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुनील 11 नवंबर से जेल में बंद था। रविवार शाम अचानक वो टहलते हुए जेल में लगे पीपल के पेड़ के पास पहुंचा। फिर पेड़ की टहनी पर गमछे का फंदा बनाया और लटक गया। मौके पर मौजूद पहरेदारों ने उसे पेड़ से नीचे उतारा, तब उसकी सांसें चल रही थी। तत्काल उसे मेकाहारा रवाना किया, लेकिन हॉस्पिटल पहुंचने से पहले उसने दम तोड़ दिया। परिजनों का पूरे मामले पर कहना है कि महानंद को जेल में लगातार मेंटली और फिजिकली टॉर्चर किया जा रहा था। हालांकि जेल प्रशासन ने मेंटली और फिजिकली किसी भी तरह के टॉर्चर की बात का खंडन किया है। परिजनों का आरोप- चोरी-छिपे भेजा गया शव परिजनों ने आरोप लगाया कि आत्महत्या के बाद बिना परिजनों को सूचना दिए बिना ही बॉडी चोरी-छिपे मार्चुरी भेज दी गई। उन्हें देर रात इस घटना की जानकारी दी गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते सूचना दी जाती, तो वे मौके पर पहुंच सकते थे। परिजनों ने जेल प्रशासन पर जानबूझकर सूचना देने में देरी करने का भी आरोप लगाया है। जेल प्रशासन का इस मामले पर कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता कैदी का उपचार कराना था, इसलिए पहले उसे हॉस्पिटल रवाना किया गया। इसके बाद परिवार काे जानकारी दी गई। पुलिस जांच में जुटी मामला गंज थाना क्षेत्र का है। सूचना मिलने पर पुलिस ने मार्चुरी पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। ये पूरी घटना जेल के सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुई है, जिसमें कैदी फांसी लगाते हुए दिखाई दे रहा है। ऐसे में पुलिस इसे आत्महत्या का मामला ही मान रही है।


