आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती, धात्रियों व बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार में फर्जीवाड़े को रोकने की कवायद शुरू की जा रही है। पोषाहार में पारदर्शिता लाने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय चेहरे की पहचान प्रणाली (फेस रिकॉगनाइजेशन सिस्टम) तथा ओटीपी सिस्टम शुरू करने जा रहा है। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों की हर योजना व वितरण की मॉनिटरिंग हो सकेगी। इसमें पोषण ट्रैकर पर दर्ज गर्भवती, धात्री महिलाओं व 0 से 3 वर्ष के बच्चों का ई-केवाईसी व फोटो ली जाएगी। इसके अलावा पोषाहार वितरण के समय दर्ज मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी जाएगा, जिसे कार्यकर्ता को पोषाहार वितरण करते समय उस ओटीपी को अपने पोषण ट्रैकर पर दर्ज करके पोषाहार वितरण किया जाएगा। इस बदलाव से पोषाहार वितरण में पारदर्शिता होगी और रियल टाइम मॉनिटरिंग भी सकेगी। वहीं इसके माध्यम से यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि केवल पात्र लोगों को ही पोषाहार प्राप्त हो। महिला एंव बाल विकास विभाग झुंझुनूं के उपनिदेशक बिजेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि गर्भवती महिलाओं, धात्रियों व बच्चों को पोषाहार वितरण करने के लिए फेस रिकॉगनाइजेशन सिस्टम व ओटीपी प्रणाली कुछ दिनो में शुरू हो जाएगी। इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया है। झुंझुनूं जिले के 1594 केंद्रों पर प्रशिक्षण पूरा ये योजना कुछ दिनों में शुरू होगी। इसे 1 जनवरी को शुरू होनी थी लेकिन ओटीपी व फेस आईडी सिस्टम सही से काम नहीं करने के कारण शुरू नहीं हो पाई। इससे पहले आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यकर्ताओं को इसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है। दरअसल ये फेस रिकॉगनाइजेशन और ओटीपी से पोषाहार वितरण का कार्य पोषण ट्रैकर एप के माध्यम से किया जाएगा।


