पौराणिक व ऐतिहासिक पहचान है ध्वजाधारी धाम की, यहां कर्दम ऋषि ने भगवान शिव की तपस्या की थी

श्री राधा-कृष्ण वार्षिकोत्सव का आयोजन 10 व 11 मार्च को किया जाएगा। वार्षिकोत्सव के पहले दिन 10 मार्च को फाल्गुन शुक्ल पक्ष एकादशी राधा-कृष्ण सह नंदीश्वर भगवान कर्दम ऋषि व रामानंदाचार्य जी का वार्षिकोत्सव का आयोजन को लेकर सुबह 10 बजे से अखंड हरिकीर्तन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। वहीं महोत्सव के दूसरे दिन 11 मार्च को फाल्गुन शुक्ल पक्ष द्वादशी पर आरती, पूर्णाहूती, प्रसाद वितरण व ब्राह्मण भोज का आयोजन किया जाएगा। भास्कर न्यूज | इटखोरी करनी कमेटी हॉल में रह रहे सेवानिवृत्त जनसेवक दिलीप प्रसाद को करनी गांव के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने सोमवार को एक कार्यक्रम आयोजित भावभीनी विदाई दी। वे इटखोरी प्रखंड के पूर्व जनसेवक थे। 6 महीना पहले वे सेवानिवृत्त हुए थे। उस समय से वे कुशल व्यवहार के कारण करनी गांव के लोगों के बीच कमेटी हॉल में रह रहे थे। इसी बीच किसी कारण बस उन्हें घर जाना पड़ा। इससे पूर्व जानकारी मिलते हीं करनी के उनके शुभचिंतकों ने आनन-फानन में विदाई समारोह आयोजित कर उन्हें सबसे पहले माला पहनकर स्वागत किया। इसके बाद उन्हें अंगवस्त्र इत्यादि उपहार स्वरूप भेंट कर विदाई दी। विदाई सह सम्मान समारोह में लोगों ने उनकी सेवा भावना की भूरी भूरी प्रशंसा की। साथ हीं साथ उनके द्वारा लोगों के प्रति कुशल व्यवहार की सराहना की गई। बता दें कि वे वर्ष 1989 में यहां योगदान दिए थे, इसके बाद से वे चतरा के विभिन्न प्रखंडों में कार्यरत रहकर सेवा दिया। कुछ साल पहले उन्हें पैरालिसिस मार दिया था। मगर लोगों ने खराब समय में उनके कुशल व्यवहार के कारण उन्हें हृदय से सहयोग किया। इसके बाद वे स्वस्थ हो गए थे। मौके पर डोमन राणा, देवकुमार सिंह, सीताराम दांगी, नवल किशोर नवल, पिंटू पाण्डेय, नरेश दांगी, संजय रजक, दशरथ दांगी, यशवंत सिंह, शंकर सेन सुमन तथा अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे। भास्कर न्यूज|कोडरमा ध्वजाधारी धाम आश्रम में दो दिवसीय महाशिवरात्रि महोत्सव मेले की तैयारी पूरी हो चुकी है। मेले का उद्घाटन बुधवार की सुबह 10.30 बजे ध्वजाधारी धाम के महामंडलेश्वर सुखदेव दास जी महाराज करेंगे। उन्होंने बताया कि मौके पर आमंत्रित अतिथि के रूप में सांसद अन्नपूर्णा देवी, विधायक डा. नीरा यादव, जिप अध्यक्ष यादव, सहित डीसी एसपी व अन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे। उन्होंने बताया कि दो दिवसीय महोत्सव के दौरान पहले दिन शाम 6 बजे से 24 घंटे का अखंड हरि कीर्तन शुरू होगा। वहीं रात 9 बजे जागरण व मंदिर परिसर में शिव पार्वती विवाह को लेकर बारात के आयोजन सहित रूद्राभिषेक का कार्य संपन्न कराया जाएगा। वहीं महोत्सव के दूसरे दिन जलाभिषेक के अलावा अखंड हरिकीतर्न की पूर्णाहूति, महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा। महाशिवरात्रि महोत्सव को लेकर मंदिरों को आकर्षक लाइटिंग से सजाया गया है। वहीं सुरक्षा को लेकर मेला परिसर में सीसीटीवी कैमरा भी लगाए गए है। मेले को लेकर जिला प्रशासन की ओर से पर्याप्त संख्या में पुलिस बल उपलब्ध कराया गया है। वहीं श्रद्धालुओं की भीड़ को लेकर एसपी अनुदीप सिंह ने पुलिस अधिकारियों को कई आवश्यक निर्देश दिए। महाशिवरात्रि को लेकर कोडरमा के ध्वजाधारी पहाड़ पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। पहाड़ के ऊपर व नीचे काफी संख्या में महिला पुलिस बल की तैनाती की गई है। इसके अलावा गश्ती दल, मजिस्ट्रेट को भी प्रतिनियुक्त किया गया है। मेला में महिला पुलिस बल के अलावा सादे लिबास में भी पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है। उन्होंने बताया कि मेला स्थल पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी के अलावा एम्बुलेंस की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। महोत्सव को लेकर परिसर में बच्चों के लिए झूले सहित व्यंजनों व खिलौनों की दुकानें सज गई है। जिला मुख्यालय से सटे ध्वजाधारी धाम के नाम से विख्यात इस जगह का पहचान काफी अरसे से धार्मिक आस्था के रूप में रही है। पौराणिक कथा के अनुसार इस जगह पर स्थित पहाड़ पर कर्दम नामक एक ऋषि ने वर्षों पूर्व भगवान शिव के दर्शन के लिए तपस्या की थी। कहा जाता है कि त्रेता युग में ऋषि कर्दम के कई वर्षों तक की गई घोर तपस्या से भगवान शिव ने प्रसन्न होकर ऋषि को ध्वज रूप में साक्षात दर्शन दिया था। तभी से यह स्थल भगवान शिव के वास स्थल के नाम से जाने-जाना लगा। साथ ही इस जिले का नाम भी कर्दम ऋषि के नाम पर कोडरमा रखा गया है। चारों तरफ से वनों से आच्छादित यह जगह धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक अनुपम का मनोहरी छटा भी प्रस्तुत करता है। मेले के अवसर पर यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु 777 सीढिय़ां चढ़कर पहाड़ पर स्थापित भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक कर अपनी मनोकामना पूरा करने का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। जंगलों के मध्य पहाड़ी तथा उसकी चोटी पर अवस्थित मंदिर का लुभावना मनोहर दृश्य उपस्थित करता है। कोई भी व्यक्ति यहां आने के बाद मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रह सकता है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता अविस्मरणीय है और जो भी यहां एक बार आता है उनकी इच्छा यहां बार-बार आने की होती है। यहां लोग भक्ति भावना से तो आते ही हैं प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेने भी लोग यहां पहुंच जाते हैं। पहाड़ी के ऊपर चढ़ाने के लिए साठ के दशक में ही सीढिय़ों का निर्माण कराया गया था जिसमें कोडरमा के प्रबुद्ध व्यवसायियों, वन विभाग के कर्मियों तथा अन्य लोगों का सहयोग रहा। पहाड़ी पर प्राचीन शिवलिंग और पार्वती तथा हनुमान की मूर्तियां हैं। पहाड़ की चोटी पर वॉच टॉवर का निमार्ण कराया गया है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां कई वर्षों से भव्य रूप से मेले का आयोजन भी होता चला आ रहा है।

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