प्रतापगढ़ शहर में देवगढ़ दरवाजे से धमोतर दरवाजे तक फैले नाला विवाद में अब नगर परिषद के सहायक अभियंता (जेईएन) दुलीचंद पर जांच के आदेश जारी किए गए हैं। इससे पहले, इस प्रकरण में पटवारी और गिरदावर को निलंबित किया जा चुका है, जबकि नगर परिषद आयुक्त को 17 सीसी नोटिस जारी किया गया था। जिला कलेक्टर अंजलि राजोरिया ने कहा कि नियमों से खिलवाड़ और मिलीभगत किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले में नाले के आसपास नियमों का उल्लंघन कर नीलाम किए गए करीब 5 करोड़ रुपए मूल्य के तीन बेशकीमती भूखंडों की नीलामी पहले ही निरस्त की जा चुकी है। 15 दिन में जवाब, नहीं तो एकतरफा कार्रवाई जिला प्रशासन द्वारा जारी नोटिस में जेईएन दुलीचन्द को 15 दिनों के भीतर लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि तय समयसीमा में जवाब नहीं दिया गया, तो उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जाएगी। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि वे व्यक्तिगत सुनवाई चाहते हैं तो इसका उल्लेख भी लिखित पक्ष में करना अनिवार्य होगा। साथ ही राजस्थान सिविल सेवाएं (आचरण) नियम 1971 का हवाला देते हुए चेतावनी दी गई है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी राजनीतिक या अन्य दबाव बनाने का प्रयास नहीं करेगा। यदि किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कोई अभ्यावेदन दिया जाता है, तो उसे संबंधित अधिकारी की पहल माना जाएगा और उस पर भी आचरण नियमों के उल्लंघन की कार्रवाई की जाएगी। राजकीय संपत्तियों से छेड़छाड़ के आरोप जेईएन दुलीचन्द पर आरोप है कि देवगढ़ दरवाजे के बाहर स्थित सार्वजनिक शौचालय, शहर के अन्य शौचालयों, चौक-चौराहों पर मौजूद राजकीय परिसंपत्तियों और हरे पेड़ों के ध्वस्तीकरण या हटाने में वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। बिना सक्षम तकनीकी प्राधिकारी से कंडम घोषित कराए, बिना तकनीकी परीक्षण, समिति की अनुशंसा और प्रशासनिक स्वीकृति के ही कार्रवाई की गई। पूरा मामला शहर के बीचों-बीच स्थित प्राकृतिक नाला क्षेत्र और उसकी परिधि की भूमि से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि यहां अवैध निर्माण, अतिक्रमण, नियमन और नीलामी से संबंधित मामलों में जेईएन की अहम भूमिका रही है।


