प्रतापगढ़ में साथिनों को दिया जा रहा आत्मरक्षा का प्रशिक्षण:कलेक्टर के सामने पंच मूवमेंट-हेड डिफेंस का प्रदर्शन किया; 4 चरणों में 140 साथिनों को मिल चुकी है ट्रेनिंग

प्रतापगढ़ जिले में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत ‘मिशन नवदुर्गा’ का पांचवां चरण शुरू हो गया है। इस नवाचार का उद्देश्य जिले में कार्यरत साथिनों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्रदान करना है। कलेक्टर डॉ. अंजलि राजौरिया की पहल पर यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस चरण में पंचायत समिति अरनोद और दलोट की 33 साथिनों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण 8 जनवरी 2026 से 17 जनवरी 2026 तक चलेगा और इसे शिक्षा विभाग के दक्ष प्रशिक्षक संचालित कर रहे हैं। जिले के वरिष्ठ अधिकारी कार्यक्रम का निरीक्षण बुधवार, 14 जनवरी को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव केदारनाथ अग्रवाल और जिला कलेक्टर डॉ. अंजलि राजौरिया ने संयुक्त रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम का निरीक्षण किया। इस दौरान उपखंड अधिकारी योगेश देवल, तहसीलदार नीतिन मेरावत, विकास अधिकारी अशोक कुमार डिंडौर और थानाधिकारी अरनोद शिवलाल मीणा सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। पांचवां चरण, पहले चार चरणों की उपलब्धियां महिला अधिकारिता विभाग की सहायक निदेशक नेहा माथुर ने बताया कि यह मिशन नवदुर्गा का पांचवां चरण है। इससे पहले प्रतापगढ़-धमोतर, सुहागपुरा-पीपलखूंट, धरियावद और छोटी सादड़ी क्षेत्रों की कुल 140 साथिनों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। ये प्रशिक्षित साथिनें अब अपनी-अपनी पंचायतों में महिलाओं और बालिकाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण दे रही हैं। साथिनों ने दिखाए आत्मरक्षा कौशल निरीक्षण के दौरान साथिनों ने पंच मूवमेंट, हेड डिफेंस और किक मूवमेंट जैसी विभिन्न आत्मरक्षा तकनीकों का प्रदर्शन किया। उपखंड अधिकारी योगेश देवल ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। जिला प्रशासन का समर्थन और सुरक्षा सखी योजना विकास अधिकारी अशोक कुमार डिण्डौर ने नवाचार की सराहना करते हुए पंचायत स्तर पर इसके प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग का आश्वासन दिया। जिला कलेक्टर ने थानाधिकारी को निर्देशित किया कि साथिनों को ‘सुरक्षा सखी’ के रूप में नामित किया जाए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव केदारनाथ अग्रवाल ने इस पहल की प्रशंसा की और अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़ने का निर्देश दिया। उन्होंने हेल्पलाइन नंबर 15100 के माध्यम से विधिक सहायता की जानकारी भी दी। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि कोई बच्चा आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित है, तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क किया जा सकता है।

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