प्रतापगढ़ जिला सेन समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें बड़ी संख्या में समाजबंधु, वरिष्ठजन और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता नागूलाल सेन ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ सेन जी महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ, जिसमें गुरु कारुलाल महाराज विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। बैठक में समाज के सर्वांगीण विकास, शिक्षा के विस्तार, सामाजिक कुप्रथाओं के उन्मूलन और संगठन को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई। समाज के छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावास निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। अनावश्यक खर्चों पर अंकुश लगाने और सामाजिक समरसता बनाए रखने के उद्देश्य से शादी-ब्याह, शोक (मोसर) और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में सादगी अपनाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। प्रत्येक गांव में सामाजिक कार्यक्रमों के लिए एक समान और सीमित राशि निर्धारित करने पर भी सहमति बनी। शोक और सामाजिक कार्यक्रमों में कपड़ा प्रथा को पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया गया। लाड़ के नाम पर दी जाने वाली अनावश्यक वस्तुओं पर रोक लगाने तथा पगड़ी दस्तूर के समय कपड़ा प्रथा को केवल ससुराल या मामा पक्ष तक सीमित रखने पर भी सहमति बनी। सामूहिक विवाह सम्मेलन कम खर्च में, सादगी और सामाजिक एकता के साथ आयोजित करने पर भी सहमति बनी। सेन समाज के सोशल मीडिया समूहों में अनावश्यक टीका-टिप्पणी, राजनीतिक और वैचारिक विवादों से बचने का निर्णय लिया गया। सदस्यों से केवल समाजहित, शिक्षा, रोजगार और सकारात्मक विषय साझा करने का आह्वान किया गया। योजनाओं से जोड़ने का आह्लान
दलित समुदाय के सामाजिक और शौर्य कार्यक्रमों में सहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने हेतु दस्तावेज पूर्ण कराने में सहयोग करने तथा सभी समाजबंधुओं को एक्सीडेंटल बीमा योजनाओं से जोड़ने का आह्वान किया गया। बैठक में केश कला बोर्ड की स्थापना, सेन चौराहा निर्माण और सेन समाज को विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी) में शामिल कर आरक्षण का लाभ दिलाने हेतु सामूहिक प्रयास करने जैसी दीर्घकालिक मांगें भी रखी गईं। बैठक के अंत में समाजबंधुओं ने सादगी, शिक्षा और संगठन की मजबूती के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया।


