कोटा में एलर्जी के कारण, निवारण, नई तकनीकी और इलाज को लेकर हाड़ौती एलर्गोकॉन का आयोजन किया गया। डॉ. केवल कृष्ण डंग एवं डॉ. संजय जायसवाल ने बताया- इस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के 350 से अधिक चिकित्सकों ने शिरकत की। कॉन्फ्रेंस का मकसद नए रिसर्च और उपचार की नई तकनीक को जानना था। दिल्ली से आए एलर्जी विशेषज्ञ डॉ. पी.सी. कथूरिया ने कहा- देश में आंखों की एलर्जी अधिक होती है, वहीं बच्चों में फूड एलर्जी अधिक देखने को मिल रही है। जिंस, एनवायरमेंट और इम्यूनिटी सिस्टम मिलकर एलर्जी का रूप लेते हैं। एलर्जी डिजीज बढ़ रही है, इस पर मंथन किया गया है। एलर्जी तेजी से बढ़ रही है और इसका मुख्य कारण प्रदूषण है। उन्होंने कहा कि एलर्जी के लिए पहले कारण ढूंढ़े, फिर निवारण हो। डॉ. एलके गुप्ता ने बताया कि बच्चों में एलर्जी बढ़ रही है, जिसमें आंख से पानी आना, गला खराब होना, जुकाम, छींके आना, सांस फूलना शामिल है। चिकित्सकों की सलाह के बिना एंटी एलर्जी की दवाएं नहीं लें नहीं तो बीमारी बढ सकती है, अस्थमा हो सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों में फूड एलर्जी होती है, लेकिन प्रोपर टेस्ट के बिना बच्चों के खाद्य पदार्थों को बंद नहीं करें। नहीं तो उसका इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर हो जाता है। हमें एलर्जी का कारण ढूंढना जरूरी है। नई जांचों के माध्यम से एलर्जी के कारणों को जानना हुआ आसान इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा एंड एप्लाइड इम्यूनोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. सुरेश कूलवाल ने बताया- यहां बच्चों के डॉक्टर, ईएनटी, आंखों के चिकित्सकों के साथ अन्य डॉक्टर्स को एलर्जी के बारे में बताया गया।नई जांचों के माध्यम से एलर्जी के कारणों को जानना हुआ आसान हुआ है, सीआरडी पद्धति से भी इलाज सरल हुआ है। कॉन्फ्रेंस में कम्पोनेंट रिसोल्ट डाइग्नोस्टिक टेस्ट की जानकारी दी, जो एलर्जी के कारणों को जानने में कारगर है। उन्होंने कहा कि एलर्जी बच्चों में अनुवांशिक होती है, ऐसे माता पिता जिन्हें एलर्जी है तो उनके बच्चों में 70 प्रतिशत एलर्जी होने की संभावना रहती है।


