प्रदेश के क्वार्ट्ज का 55% और फेल्सपार का 37% हिस्सा, तो भी सेरामिक जोन नहीं

भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा प्रदेश के कुल क्वार्ट्ज भंडार का करीब 55 फीसदी और फेल्सपार का लगभग 37 प्रतिशत हिस्सा अकेले भीलवाड़ा जिले में मिलता है। इसके बावजूद यहां सेरामिक जोन विकसित नहीं है। यहां न तो अतिरिक्त निवेश हो पा रहा है और न संभावना के अनुरूप लोगों को रोजगार मिल रहा है। ऐसे में प्रदेश सरकार की बजट घोषणा में जिले में सेरामिक जोन विकसित किए जाने की मांग को लेकर एक बार फिर उद्योग जगत को उम्मीद है। उद्यमियों का कहना है कि सेरामिक उद्योग के लिए आवश्यक प्रमुख कच्चा माल क्वार्ट्ज और फेल्सपार भीलवाड़ा जिले में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जिले में सेरामिक जोन विकसित करने का निर्णय लिया था। इसके तहत आसींद तहसील के मोड़ का निम्बाहेड़ा गांव में लगभग 510 हेक्टेयर जमीन आरक्षित की गई थी। इस परियोजना को साकार करने के लिए मुंबई की इंपीरियल टैक्स पार्क प्राइवेट लिमिटेड के साथ 600 करोड़ रुपए के निवेश का एमओयू भी किया गया था। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार यदि सेरामिक जोन विकसित होता है, तो इससे जिले में लगभग 5,000 करोड़ रुपए के निवेश की संभावना है। साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 5,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। इससे न केवल भीलवाड़ा वरन आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी। उद्योग संगठनों ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि आगामी राज्य बजट घोषणा में भीलवाड़ा सेरामिक जोन परियोजना को शामिल किया जाए, ताकि जिले की औद्योगिक क्षमता का पूर्ण उपयोग हो सके और क्षेत्र को एक नई पहचान मिल सके। केंद्र और राज्य सरकार का राजस्व बढ़ेगा इसके अलावा सेरामिक जोन के विकसित होने से केंद्र और राज्य सरकार को भी करों के माध्यम से बड़े पैमाने पर राजस्व मिलेगा। स्थानीय स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर, परिवहन और सहायक उद्योगों का भी विकास होगा।

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