मप्र में निजी और सरकारी मिलाकर लगभग 7 हजार वेयरहाउस बने हैं, जिनमें 430 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) भंडारण उपलब्ध है, पर जरूरत लगभग 250 एलएमटी की रहती है। इस स्थिति में निजी वेयरहाउस नुकसान में जाते हैं, जबकि सरकारी भी काफी खाली रहते हैं। इस स्थिति को बदलने और मप्र को लॉजिस्टिक्स हब बनाने के लिए अन्य सेक्टर में स्टोरेज का उपयोग करने और ऑटोमेशन-सप्लाई चेन पर आधुनिक ट्रेनिंग देंगे। फोकस होगा कि अनाज के अलावा स्टोरेज सुविधा का उपयोग करके कैसे आमदनी बढ़ाई जाए। राजधानी में बुधवार को वेयरहाउस संचालकों, लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट, इंडस्ट्री के अधिकारियों और खाद्य विभाग के अधिकारियों की राज्य स्तरीय कार्यशाला होगी। इसमें आईआईएम मुंबई के दो प्रोफेसर अपने सत्र में वेयरहाउस ऑटोमेशन और सप्लाई चेन मैनेजमेंट पर जानकारी देंगे। वहीं, डेलॉइट के एक्सपर्ट अनुराग गुप्ता और जानी-मानी लॉजिस्टिक्स फर्म मुसद्दीलाल समूह के कैलाश मोर भी प्रदेश को लॉजिस्टिक्स हब बनाने के लिए जानकारी देंगे। ज्यादा उपलब्ध, निजी संचालक बनाते हैं दबाव
मप्र में गेहूं -धान के लिए लगभग 120 एलएमटी तो अन्य फसलों और पुराने स्टॉक को मिलाकर लगभग 250 एलएमटी स्टोरेज की जरुरत होती है। केंद्र की योजना में सब्सिडी लेकर बड़ी संख्या में निजी वेयरहाउस बन गए हैं। अब अपनी संचालन लागत निकालने के लिए निजी संचालक अपने गोदाम भरने का दबाव बनाते हैं। कई बार करोड़ों का किराया लंबित हो जाता है। इससे बचने खाद्य विभाग ने वैकल्पिक योजना बनाई है।


