निवाड़ी में किसानों ने जमीन विवाद को लेकर प्रभारी मंत्री की गाड़ी रोक दी। ज्ञापन सौंपने के बाद किसान उनके पैरों में गिर पड़े, लेकिन जब कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला तो वे भड़क गए। इसके बाद भीड़ ने कलेक्टर की गाड़ी घेर ली। हालात इतने बिगड़े कि सुरक्षाकर्मियों को लोगों के सामने हाथ जोड़कर समझाइश करनी पड़ी। शनिवार शाम ओरछा तहसील के मौजा गुदरई के किसान अपनी जमीन से जुड़े सीमांकन और कब्जे के विवाद को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे। प्रभारी मंत्री नारायण कुशवाहा गढ़कुंढार महोत्सव की समीक्षा बैठक के लिए कलेक्टर कार्यालय आए हुए थे। इसी दौरान बड़ी संख्या में किसान वहां एकत्र हो गए। किसानों ने प्रभारी मंत्री से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई और ज्ञापन सौंपा। न्याय की गुहार लगाते हुए कुछ किसान मंत्री के पैरों में भी गिर पड़े। हालांकि मंत्री की ओर से कोई स्पष्ट और ठोस आश्वासन नहीं मिला, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ गई। कलेक्टर की गाड़ी रोकी, मुर्दाबाद के लगाए नारे
नाराज किसानों ने पहले प्रभारी मंत्री की गाड़ी रोकने की कोशिश की। इसके बाद भीड़ का रुख जिला कलेक्टर जमुना भिड़े की गाड़ी की ओर हो गया। किसानों ने बीच सड़क पर कलेक्टर की गाड़ी घेर ली और “कलेक्टर मुर्दाबाद” तथा “प्रशासन हाय हाय” के नारे लगाने लगे। महिलाओं और पुरुषों की भीड़ के कारण मौके पर तनावपूर्ण हालात बन गए। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। कलेक्टर की सुरक्षा में तैनात कर्मियों सहित अधिकारियों ने किसानों को समझाने का प्रयास किया। सुरक्षाकर्मी लोगों के सामने हाथ जोड़ते नजर आए। करीब आधे घंटे तक सड़क पर अफरा-तफरी और शोर-शराबा चलता रहा, जिसके बाद किसी तरह स्थिति पर काबू पाया जा सका। देखिए तस्वीरें महिला रोते हुए बोली- पुलिस ने धक्का दिया
हंगामे के दौरान ग्रामीण महिला मुन्नी बाई रोते हुए सामने आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री से न्याय की गुहार लगाने के दौरान पुलिस ने उन्हें धक्का दिया, जिससे उनके हाथ में चोट आई। किसानों ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में भूमाफिया सक्रिय हैं और प्रशासन उनके संरक्षण में काम कर रहा है। नए सीमांकन के जरिए जमीन छीनी जा रही
ग्रामीणों का कहना है कि वे अब तक 50 से अधिक आवेदन दे चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उनके अनुसार, 2009 में हुए सीमांकन के आधार पर वे अपनी जमीन पर कब्जा चाहते हैं, जबकि प्रशासन द्वारा कराए गए नए सीमांकन को वे गलत बता रहे हैं। किसानों का आरोप है कि इसी नए सीमांकन के जरिए उन्हें उनकी हक की जमीन से बेदखल किया जा रहा है। क्या है मुख्य विवाद?
गुदरई गांव की जमीन का यह विवाद सीमांकन में फंसा हुआ है। किसान 2009 के सीमांकन के आधार पर जमीन पर अपना कब्जा चाहते हैं। वहीं, जिला कलेक्टर ने इस मामले के समाधान के लिए एक 5 सदस्यीय दल गठित कर नया सीमांकन कराया था। किसान इस नए सीमांकन से पूरी तरह असंतुष्ट हैं और इसे गलत मान रहे हैं।


