भास्कर न्यूज | सरायकेला जगन्नाथ धाम पुरी की तर्ज पर जगन्नाथ संस्कृति के पोषक सरायकेला में आयोजित परंपरागत रथ यात्रा के दूसरे दिन महाप्रभु श्री जगन्नाथ का रथ गोपबंधु चौक स्थित बड़ादांड़ से शुक्रवार की रात्रि विश्राम के पश्चात शनिवार की दोपहर बाद खींचा जाना प्रारंभ हुआ। इससे पूर्व शनिवार की प्रातः बेला से ही भक्त रथ के पास पहुंचकर महाप्रभु की पूजा- अर्चना करते रहे। दोपहर में सैकड़ों की संख्या में जगन्नाथ भक्तों की भीड़ के साथ महाप्रभु का रथ नयनपथगामी जय जगन्नाथ, जय-जय जगन्नाथ के जयकारे के साथ भक्तों द्वारा खींचना शुरू किया गया। इस दौरान रथ यात्रा मार्ग में प्रत्येक घर के दरवाजे पर अल्पना बनाकर और चौक चौराहा पर महाप्रभु श्री जगन्नाथ की आरती उतारते हुए शुभ बाजा के साथ उनका स्वागत किया गया। रथ यात्रा के क्रम में भक्तों द्वारा महाप्रभु को भोग प्रसाद का चढ़ावा चढ़ाया गया और पुजारी के दल द्वारा रथ के ऊपर से भक्तों के बीच प्रसाद लुटाए गए, जिसे लपकने के लिए भक्तों में खासा उत्साह रहा। महाप्रसाद के रूप में रथ से लुटाए गए प्रसाद को लपकने की शुभ मान्यता रही है। देर शाम महाप्रभु श्री जगन्नाथ का नए आठ पहियों वाला सुसज्जित रथ मौसीबाड़ी गुंडिचा मंदिर के द्वार पर पहुंचा, जहां पंडित ब्रह्मानंद महापात्र व पंडित सानू षाड़ंगी सहित पुजारियों के पूरे दल द्वारा भक्तों के साथ मौसीबाड़ी द्वार पर आरती उतार कर महाप्रभु श्री जगन्नाथ व बहन सुभद्रा और अग्रज बलभद्र का भव्य स्वागत किया गया। जयकारे के बीच गोद में उठाकर तीनों के विग्रहों को मौसीबाड़ी में प्रवेश कराया गया, जिसके बाद गुंडिचा मंदिर के सिंहासन पर विराजमान करते हुए वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की गई। सामूहिक आरती के पश्चात भक्तों ने महाप्रभु के दर्शन करते हुए पूजा आराधना की। रथ यात्रा के दौरान आयोजक श्री जगन्नाथ सेवा समिति के तमाम अधिकारी और सदस्य रथ के साथ मौजूद रहे। साथ ही विधि व्यवस्था को लेकर सरायकेला पुलिस भी मुस्तैद दिखी। रथ यात्रा के दौरान पारंपरिक लोक कला नृत्य की झलक और ओडिशा से पधारे कलाकारों द्वारा ओडिसी नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति देखकर श्रद्धालु व दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।


