आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (EWS) के हजारों युवाओं के सामने इन दिनों एक अजीब सा संकट खड़ा हो गया है। राज्य सरकार के नियमों के विरोधाभास के चलते मेधावी छात्र उच्च शिक्षा और आवासीय सुविधाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। एक तरफ केंद्र और राज्य सरकार ने EWS प्रमाण पत्र के लिए वार्षिक आय सीमा 8 लाख रुपए निर्धारित की है, वहीं दूसरी ओर छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए इस सीमा को घटाकर महज 1 लाख से 2.5 लाख रुपए तक सीमित कर दिया गया है। इस विसंगति के कारण उन मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे परेशान हैं जिनकी आय 8 लाख से कम है, लेकिन 1 या 2 लाख से अधिक है। प्रमाणपत्र के लिए अलग, लाभ के लिए अलग छात्र राजेश शर्मा ने बताया कि नियमों का यह दोहरापन युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। वर्तमान में EWS वर्ग का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए परिवार की कुल वार्षिक आय 8 लाख रुपए से कम होनी चाहिए। लेकिन जब छात्र योजनाओं के लिए आवेदन करते हैं, तो पात्रता की शर्तें बदल जाती हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित अम्बेडकर डीबीटी वाउचर योजना (सत्र 2025-26) में आवेदन की प्रक्रिया जारी है, जिसकी अंतिम तिथि 31 दिसम्बर 2025 है। योजना के तहत एससी, एसटी, ओबीसी, एमबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के कॉलेज छात्रों को आवासीय सुविधा के लिए आर्थिक मदद दी जाती है। जहां एससी, एसटी और एमबीसी के लिए आय सीमा 2.50 लाख और ओबीसी के लिए 1.50 लाख है, वहीं ईडब्ल्यूएस (EWS) वर्ग के लिए इसे घटाकर केवल 1 लाख रुपए कर दिया गया है। छात्र अशोक ने कहा कि जब प्रमाणपत्र 8 लाख की आय पर मान्य है, तो योजना का लाभ 1 लाख की सीमा पर क्यों दिया जा रहा है। योजनाओं के इन जटिल नियमों को लेकर युवा परेशान है। प्रवीण शर्मा ने बताया कि ईडब्ल्यूएस के विद्यार्थियों को अलग से छात्रवृत्ति मिलनी चाहिए। इसकी वार्षिक आय-सीमा आठ लाख रुपए तक होनी चाहिए। अभी आय सीमा काफी कम है, इसे बढ़ाया जाना चाहिए ताकि जरूरतमंद छात्रों को वास्तव में लाभ मिल सके। कर्ण सिंह शेखवात ने राज्य सरकार की छात्रवृत्ति सभी वर्ग के युवाओं को आठ लाख रुपए वार्षिक की आय पर मिलनी चाहिए। ईडब्ल्यूएस का प्रमाण पत्र जितनी सीमा तक बनता है, उसी के अनुरूप छात्रवृत्ति की पात्रता तय होनी चाहिए।


